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Nokia ने चंद्रमा पर लगा दिया सेल्‍युलर टावर, पर नहीं हो पाई कॉल

चंद्रमा पर इंसानों को दोबारा भेजने की कोशिशें जोरों पर हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और उसकी पार्टनर कंपनियां अलग-अलग टास्‍क पूरे कर रही हैं। इसी क्रम में नोकिया ने चांद पर पहला सेल्‍युलर नेटवर्क इंस्‍टॉल करने का दावा किया है। यह अमेरिकी कंपनी इंट्यूटिव मशीन्स के IM-2 मिशन का हिस्सा था। मिशन ने 10 मार्च को चांद के साउथ पोल पर लैंडिंग की। दिलचस्‍प बात यह रही कि नेटवर्क से डेटा तो भेजा गया, लेकिन पावर की कमी और बहुत ज्‍यादा ठंड के कारण कॉल कनेक्‍ट नहीं हो पाई। लेकिन यह भविष्‍य के मून मिशनों के लिए महत्‍वपूर्ण है। खासतौर पर जब अमेरिका आर्टिमिस मिशन के तहत चांद पर दोबारा से इंसान को भेजने की योजना पर काम कर रहा है।

चांद से धरती तक पहुंचा डेटा

नोकिया का यह एक्‍सपेरिमेंट नासा के कमर्शल लूनार पेलोड सर्विसेज (CLPS) इन‍िशिएटिव का हिस्‍सा था। नोकिया ने दावा किया है कि चांद पर नेटवर्क के जरूरी हिस्‍सों का ट्रायल सफल रहा है। जिस नेटवर्क को वहां इंस्‍टॉल किया गया, उसने इंट्यूटिव मशीन्स के ग्राउंड स्टेशन और नोकिया के मिशन कंट्रोल सेंटर को डेटा भेजा।

25 मिनट तक बनी रही कनेक्टिविटी

एक अन्‍य रिपोर्ट में बताया गया है कि चांद पर मौजूद सेल्‍युलर नेटवर्क ने धरती पर मौजूद दोनों स्‍टेशनों से कॉन्‍टैक्‍ट कर लिया। करीब 25 मिनट तक कनेक्टिविटी बनी रही, जिससे कन्‍फर्म हुआ कि सभी सिस्‍टम काम कर रहे हैं और एक-दूसरे के साथ कनेक्‍ट हो पा रहे हैं। नोकिया का दावा है कि बेस स्‍टेशन, रेडियो और नेटवर्क कोर ठीक से काम कर रहे थे।

ज्‍यादा ठंड के कारण आई रुकावट

लेकिन मंसूबों को थोड़ा झटका लगा, क्‍योंकि चांद पर पहली सेल्‍युलर कॉल नहीं हो पाई। दरअसल, शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन बहुत अधिक ठंड की वजह से चांद पर इंस्‍टॉल किए गए हॉपर मॉड्यूल ने काम करना बंद कर दिया। इस वजह से कनेक्‍शन नहीं बन सका। नोकिया का कहना है कि उसे इस कामयाबी पर गर्व है, क्‍योंकि चांद पर परिस्थितियां आसान नहीं हैं। अगर डिवाइस मॉड्यूल तक वर्किंग होते, जब नेटवर्क बॉक्‍स चालू था, तो निश्‍चित रूप से चांद और धरती के बीच पहली सेल्‍युलर कॉल लग जाती।

चांद पर लैंडर उतारने वाली पहली प्राइवेट कंपनी है IM

इंट्यूटिव मशीन्स के लिए भी यह सफलता अहम है। वह दुनिया की पहली प्राइवेट कंपनी है, जिसके लैंडर ने सफलता के साथ चांद पर लैंड किया था। कंपनी ने यह कामयाबी पिछले ही साल फरवरी में पाई थी। IM-2 मिशन में नोकिया के साथ पार्टनरशिप करके वह एक कदम और आगे बढ़ी है। दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंस‍ियां और स्‍पेस कंपनियां, चंद्रमा पर अपने मिशन भेजने में जुटे हैं। लेकिन नासा और इंट्यूटिव मशीन्स की कोशिशें काफी आगे हैं।

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