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वंदे मातरम पर नड्डा-खडग़े भिड़े, दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक, उपराष्ट्रपति को देना पड़ा दखल

संसद के शीतकालीन सत्र के 9वें दिन वंदे मातरम पर बहस गरमा गई। चर्चा के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा जवाहरलाल नेहरू पर की गई टिप्पणी के बाद राज्यसभा में हंगामा मचा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने नेहरू को बहस का केंद्र बनाने पर सवाल उठाया। श्री नड्डा ने कांग्रेस पर संस्कृति से समझौता करने का आरोप लगाया, वहीं श्री खडग़े ने आरोपों को विकृत और असत्य बताया, जिससे दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। अंतत: अध्यक्ष उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के हस्तक्षेप के बाद श्री नड्डा ने कहा कि सरकार केवल ऐतिहासिक तथ्यों को सही करना चाहती है, न कि नेहरू की छवि को धूमिल करना।

चर्चा के दौरान श्री नड्डा ने कहा कि हमारा उद्देश्य भारत के पूर्व पीएम को बदनाम करना नहीं, लेकिन इतिहास को रिकॉर्ड पर रखना जरूरी है। श्री नड्डा ने कहा कि जब कोई घटना घटती है, तो जिम्मेदार सरदार ही होता है। कांग्रेस पार्टी की सरकार के सरदार नेहरू ही थे, इसलिए जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। वहीं श्री खडग़े ने पूछा कि क्या चर्चा का विषय वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ है या फिर चर्चा का मुख्य विषय जवाहरलाल नेहरू हैं। श्री खडग़े ने नड्डा पर नेहरू का अपमान करने का आरोप लगाया।

वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर सम्मान देने के साथ चर्चा संपन्न

‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष होने के उपलक्ष्य में राज्यसभा में तीन दिन की चर्चा सदन के नेता और भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा के इस आह्वान के साथ संपन्न हुई कि इस गीत को राष्ट्रगान जन-गण-मन के समान ही स्थान मिलना चाहिए। श्री नड्डा ने चर्चा का समापन करते हुए कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि इसको राष्ट्रगान के समान ही स्थान मिलेगा और इसका उसके बराबर ही सम्मान होगा।

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