छत्तीसगढ़

दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ का ‘मुरिया दरबार’, मुख्यमंत्री ने झांकी में शामिल बच्चियों को दी शुभकामनाएं

रायपुर। गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की झांकी के तौर पर ‘मुरिया दरबार’ को प्रदर्शित किया जाएगा. झांकी का हिस्सा बनने वाली बालिकाओं से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चर्चा करने के साथ अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी. 

जनसंपर्क विभाग के आयुक्त मयंक श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री साय को अवगत कराया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी भारत सरकार द्वारा प्रदत्त थीम भारत लोकतंत्र की जननी पर आधारित है. छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार जनजातीय समाज में आदि-काल से उपस्थित लोकतांत्रिक चेतना और परंपराओं को दर्शाती है, जो आजादी के 75 साल बाद भी राज्य के बस्तर संभाग में जीवंत और प्रचलित है.

मुरिया दरबार बना बस्तर दशहरा का हिस्सा

बस्तर में मुरिया दरबार की शुरुआत 8 मार्च, 1876 को हुई थी, जिसमें सिरोंचा के डिप्टी कमिश्नर मेक जार्ज ने मांझी- चालकियों को संबोधित किया था. बाद में लोगों की सुविधा के अनुरूप इसे बस्तर दशहरा का अभिन्न अंग बनाया गया, जो परंपरानुसार 145 साल से जारी है.

मुरिया दरबार में पहले राजा और रियासत के अधिकारी कर्मचारी मांझियों की बातें सुना करते थे, और तत्कालीन प्रशासन से उन्हें हल कराने की पहल होती थी. आज़ादी के बाद मुरिया दरबार का स्वरूप बदल गया. 1947 के बाद राजा के साथ जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल होने लगे.

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