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मां ने घर का पंखा बेचकर किया था पिता का अंतिम संस्कार, बेटी आज ₹157 करोड़ की कंपनी की मालकिन

ग्वालियर की रहने वाली सीमा की कंपनी आज पैकेजिंग में एक जाना-पहचाना नाम है। लेकिन उनकी शुरुआत बचपन बहुत साधारण रहा।

 सीमा बताती हैं, ‘मेरे पिता का देहांत तब हो गया था जब मैं डेढ़ साल की थी। हमारे हालात इतने खराब थे कि मेरी मां के पास मेरे पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए भी पैसे नहीं थे। हमारे घर में एक सीलिंग फैन था, जिसे मेरी मां ने 170 रुपये में बेच दिया था और उसी पैसे से उन्होंने मेरे पिता का अंतिम संस्कार किया।’

आज समय पूरी तरह बदल गया है। सीमा एक पैकेजिंग बिजनेस चलाती हैं। अपनी हिम्मत और लगातार मेहनत से, उन्होंने एक ऐसी कंपनी खड़ी की है जिसके काम आज पूरे भारत और यूएई में फैले हुए हैं। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, मुश्किलों का सामना किया। अपनी लगन और पक्के इरादे से उन्होंने एक छोटी सी शुरुआत को आज 157 करोड़ रुपये की कंपनी बना दिया है। उनकी कंपनी का नाम DCG Tech Limited है। वह कंपनी की फाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं।

आसान नहीं रहा सफर

सीमा बंसल जब पहली बार पैकेजिंग का बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच रही थीं, तब वे बेरोजगार थीं। उनके पास कोई पैसा नहीं था। उन्होंने अपने घर के एक छोटे से डेस्क से काम शुरू किया और हर काम खुद ही करती थीं। वे गाड़ी चलाती थीं, सामान बेचती थीं, हिसाब-किताब रखती थीं और मैनेजर भी वही थीं। बिजनेस चलाने के लिए जो भी छोटे-मोटे काम थे, सब वे खुद ही करती थीं।

उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर कंपनी को बड़ा किया। सीमा बंसल की कंपनी आज भारत की पैकेजिंग इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बन चुकी है। उनकी कंपनी पैकेजिंग के सॉल्यूशंस देती है। वे 50,000 से ज्यादा ग्राहकों को टिकाऊ और टेक्नोलॉजी वाली पैकेजिंग देती हैं, जो आज के बदलते बिजनेस की जरूरतों को पूरा करती है।

मुश्किल में बीता बचपन

सीमा बंसल का बचपन मुश्किलों में बीता है। पिता के जाने के बाद उनकी मां ने अकेले ही चार बच्चों को पाला। वे संगीत सिखाकर पैसे कमाती थीं और चारों बच्चों को एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाती थीं। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े हुए और पढ़ाई का खर्च बढ़ा, मां के लिए सब संभालना मुश्किल हो गया। तब उन्होंने सीमा को एक सरकारी स्कूल में डाल दिया। वहां पढ़ाई का तरीका बिल्कुल बदल गया, सीमा के कोई दोस्त नहीं थे और वे छह महीने तक स्कूल नहीं गईं। जब वे वापस लौटीं, तो उन्होंने अपनी क्लास में टॉप किया।

कैसे हुई शुरुआत?

शुरुआती परेशानियों के बाद सीमा अपने भाई के साथ मुंबई आ गईं। वे अपनी मौसी के साथ रहने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन उन्हें वहां से जाने को कह दिया गया और काम ढूंढने के लिए कहा गया। वे एक छोटी सी टिन की झोपड़ी में रहते थे, जो गर्मियों में बहुत गर्म हो जाती थी। सीमा ने कई छोटे-मोटे काम किए, और फिर आखिरकार उन्हें एक IT कंपनी में नौकरी मिल गई, जो उनके लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई। उन्हें लंदन ऑफिस में काम करने का मौका मिला और उन्होंने बिना सोचे-समझे हां कर दी।

लंदन में हुई शादी

लंदन में उन्होंने कई साल तक काम किया। इसी दौरान उनकी एक शख्स से मुलाकात हुई। उनसे ट्यूनिंग अच्छी रही और बाद में दोनों ने शादी कर ली। सीमा बताती हैं कि बाद में उनके पति अमेरिका चले गए और वॉल स्ट्रीट पर एम्पायर स्टेट बिल्डिंग में एक ऑफिस खोला। वह बताती हैं, ‘बिजनेस अच्छा चल रहा था। हमने तीन फ्लोर का ऑफिस लिया, बैंक ऑफ अमेरिका में नौकरी पाई और ग्रीन कार्ड भी मिल गया। कुछ समय बाद मेरे पति को बिजनेस में बहुत बड़ा नुकसान हुआ, और हमने सब कुछ गंवा दिया और भारत लौट आए।’

फिर शुरुआत की DCG Packs की

सीमा ने बताया, ‘हम अपने पति के छोटे भाई के साथ रहने लगे। मेरे पति ने किसी दूसरी कंपनी में कुछ पैसे लगाए, जबकि मैं बेरोजगार थी। लंदन में हर महीने हमारे घर पैकेजिंग का एक कैटलॉग आता था, और हम अक्सर सोचते थे कि कभी पैकेजिंग का बिजनेस शुरू करेंगे। शायद हम वही सोच रहे थे। मुझे पैकेजिंग इंडस्ट्री का कोई अनुभव नहीं था, और यह इंडस्ट्री ज्यादातर पुरुषों का ही दबदबा वाली है।’ यहीं से सीमा ने DCG Packs की शुरुआत की। आज कंपनी की ऐसी सफलता मिली कि दूसरों की प्ररेणा बन रही हैं।

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