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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से हो रहे सबसे ज्यादा ठगी

बस्ती। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए लोगों को ब्लैकमेल करने के मामले बढ़ गए हैंं। लगातार सामने आ रहे इस तरह के मामलों से जाहिर है कि साइबर अपराधियों ने इस तरकीब को हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। आवाज बदलकर कॉल करने वाले वायस स्कैम से दो कदम आगे बढ़ते हुए अब फर्जी फोटो का भी इस्तेमाल करने लगे हैं।
मंगलवार को सामने आए मामले में छावनी के एक मेडिकल स्टोर संचालक को साइबर अपराधियों ने जाल में फंसाया। अपराधी ने खुद को कोतवाल बताते हुए पुलिस वाले की फोटो लगी डीपी से वाट्सएप पर एक दवा की लिस्ट भेजकर उसकी कीमत पूछी। मेडिकल स्टोर संचालक के 1480 रुपये बताने पर 14080 रुपये भेजने का मैसेज भेज दिया। कहा कि गलती से अधिक रुपये भेज दिया है। वापस करने की बात पर दुकानदार को शक हुआ। एकाउंट चेक किया तो रुपये नहीं आए थे।

25 दिसंबर को भी सोनहा थानाक्षेत्र सिहारी सरदहा निवासी रतिकेश वर्मा भी ऐसी ही ठगी का शिकार हो चुके हैं। वहीं, इससे पहले नगर कस्बे के एक युवक को भी ऐसे ही फोन कॉल आई थी। रुपये ट्रांसफर करने से पहले उसे शक हुआ तो उसने अपने रिश्तेदार से बात की। फिर उसे ठगी की कोशिश की जानकारी हुई।


नई चुनौती बनकर उभरा यह स्कैम
– आईजी आरके भारद्वाज के अनुसार एआई तकनीक का साइबर अपराधी कई तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं। एक तो वे आवाज बदलकर मदद या उधार के रूप में रुपये मांगते हैं। दूसरे, परिचित बनकर फोन करेंगे कि आपके एकाउंट में कुछ रुपये भेज रहे हैं। बाद में कहेंगे कि गलती से ज्यादा रुपया चला गया है। वापस मंगवाने के चक्कर में फंसाकर ठगी कर लेते हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है। ऐसा होने पर पुलिस के साइबर सेल से शिकायत करनी चाहिए।

जीजा बताकर ठग लिया था 20 हजार

– छह नवंबर की शाम 6:53 बजे सोनहा क्षेत्र के सिहारी सरदहा गांव के रतिकेश शर्मा के मोबाइल फोन पर अनजान नंबर से कॉल आई। सामने वाले व्यक्ति ने खुद को रतिकेश का जीजा बताया। बताया कि मां की तबीयत खराब है। तत्काल रुपयों की जरूरत है। बीस हजार रुपये भेज दीजिए, वापस लौटा दूंगा। हूबहू आवाज आने पर विश्वास करते हुए रतिकेश ने बीस हजार रुपये भेज दिए। फोन करने वाले के खाते में रुपया जाने के बाद उसका मोबाइल नंबर बंद हो गया। इसके बाद रतिकेश को समझ में आया कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। उनकी तहरीर पर 23 दिसंबर को केस दर्ज हुआ।

इस तरह करें बचाव

– अनजान नंबर से आ रहे फोन कॉल का जवाब देने में सतर्कता बरतें।

– अगर कोई आपका परिचित बनकर अनजान नंबर से फोन करे, तो पहले उसकी सत्यता की जांच करें।

– फ्रॉड करने वाले अक्सर अर्जेंट, तुरंत, अभी जैसी जरूरतों का बहाना देते हैं, तो इनसे अलर्ट रहें।

– संदिग्ध मैसेज या ईमेल में भेजे गए लिंक पर कभी क्लिक न करें।

– अज्ञात स्रोतों से मिले क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें।

– अपने बैंक या कार्ड से जुड़ी जानकारियां किसी को न दें।

– कुछ भी संदिग्ध लगे तो तुरंत बैंक/पुलिस में शिकायत करें।

– डर/घबराहट से बचें। आपका डर अपराधियों का हथियार बन जाता है।

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