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मोदी सरकार का संकल्प है विकसित भारत, जनहित में अनेक कल्याणकारी योजनाएं

Modi 3.0 100 Days : मोदी सरकार ने विगत एक दशक में उस मिथक को तोड़ा है, जिसमें यह माना जाता था कि सरकार की विकास एवं कल्याण योजनाएं लक्षित समूहों तक नहीं पहुंच पातीं. देश में हर परिवार को आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से चलायी जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आज 2.45 करोड़ से ज्यादा पक्के मकान देने से लेकर 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण और किसान सम्मान निधि के तहत देश के लगभग 12 करोड़ किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता राशि देने तक सरकार की अनेक योजनाएं सफलतापूर्वक लक्षित समूहों तक पहुंच रही हैं, वह भी बिना किसी रिसाव के, नियमित रूप से, पूरे का पूरा सौ प्रतिशत. वैसे एक महिला होने के नाते मुझे विगत 10 वर्षों का समय तो ‘महिलाओं को समर्पित मोदी कार्यकाल’ के रूप में दिखाई देता है. वर्ष 2014 में सरकार गठन के कुछ समय पश्चात ही ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना से कन्या-महिला कल्याण की दिशा में जो यात्रा शुरू हुई, वह आज भी अनवरत जारी है. ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत महिलाओं को धुएं से बचाना हो, या फिर ‘जन-धन योजना’ के तहत 25 करोड़ से अधिक महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना हो, विगत 10 वर्षों में सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक ठोस प्रयास किये हैं. महिलाओं के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता की मिसाल है कि 2013-14 में जेंडर बजट जहां लगभग 97 करोड़ रुपये था, वहीं 2024 के बजट में 237 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा कर दिया गया है.

लगभग सौ दिन पूर्व संपन्न लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली एनडीए पर जनता ने लगातार तीसरी बार भरोसा जताया. यह जीत दरअसल मोदी सरकार द्वारा विगत एक दशक में किये गये कार्यों पर जनता की संतुष्टि की मुहर थी. यदि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पिछले एक दशक के कार्यों का आकलन किया जाए, तो सरकार की अनेकानेक उपलब्धियां रही हैं. फिर भी, मेरी दृष्टि में कुछ कार्य ऐसे हुए हैं, जिन्हें भविष्य के इतिहासकार स्वर्णाक्षरों में अंकित करेंगे. बीते एक दशक में मोदी सरकार ने जनहित में ऐसे कई फैसले लिये, जो अभूतपूर्व हैं. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के द्वारा अप्रत्यक्ष कराधान में सुधार तथा तीन तलाक निरोधी कानून के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं को गरिमामयी जीवन प्रदान करने से लेकर संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करना आदि जैसे अनेक फैसले न सिर्फ वर्तमान, बल्कि भविष्य के भारत की भी आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक रूपरेखा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे.

मोदी सरकार ने मिथक को तोड़ा

मोदी सरकार ने विगत एक दशक में उस मिथक को तोड़ा है, जिसमें यह माना जाता था कि सरकार की विकास एवं कल्याण योजनाएं लक्षित समूहों तक नहीं पहुंच पातीं. देश में हर परिवार को आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से चलायी जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आज 2.45 करोड़ से ज्यादा पक्के मकान देने से लेकर 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण और किसान सम्मान निधि के तहत देश के लगभग 12 करोड़ किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता राशि देने तक सरकार की अनेक योजनाएं सफलतापूर्वक लक्षित समूहों तक पहुंच रही हैं, वह भी बिना किसी रिसाव के, नियमित रूप से, पूरे का पूरा सौ प्रतिशत. वैसे एक महिला होने के नाते मुझे विगत 10 वर्षों का समय तो ‘महिलाओं को समर्पित मोदी कार्यकाल’ के रूप में दिखाई देता है. वर्ष 2014 में सरकार गठन के कुछ समय पश्चात ही ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना से कन्या-महिला कल्याण की दिशा में जो यात्रा शुरू हुई, वह आज भी अनवरत जारी है. ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत महिलाओं को धुएं से बचाना हो, या फिर ‘जन-धन योजना’ के तहत 25 करोड़ से अधिक महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना हो, विगत 10 वर्षों में सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक ठोस प्रयास किये हैं. महिलाओं के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता की मिसाल है कि 2013-14 में जेंडर बजट जहां लगभग 97 करोड़ रुपये था, वहीं 2024 के बजट में 237 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा कर दिया गया है.

मुद्रा ऋण योजना में महिलाओं की भागीदारी 68 प्रतिशत

इसी तरह, मोदी सरकार द्वारा छोटे व्यवसायियों की मदद के लिए शुरू की गयी मुद्रा ऋण योजना में महिलाओं की भागीदारी 68 प्रतिशत है. अब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हमारे सामने है. इसके अलावा, स्टैंड अप इंडिया के तहत खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसके तहत अब तक 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किये जा चुके हैं. ‘मिशन शक्ति’, ‘सेल्फी विद डॉटर’ और ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ जैसी योजनाओं ने हमारी बालिकाओं और युवतियों के लिए नया आसमान खोला है. मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन कर महिला कर्मी को मिलने वाले मातृत्व अवकाश की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है. यही नहीं, वर्षों से लंबित लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को पारित कर मोदी सरकार ने महिलाओं का अभूतपूर्व राजनीतिक सशक्तीकरण किया है. यह एक ऐतिहासिक महत्व का कदम है. आज का भारत ‘महिला नेतृत्व में विकास’ की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है. सरकार के इन प्रभावकारी उपायों से देश में महिलाएं अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर हुई हैं.

‘पीएम गतिशक्ति’ व ‘सागरमाला’ योजनाओं का व्यापक प्रभाव

विधिशास्त्र की एक सूक्ति है कि ‘न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए’. इसी तरह, विकास भी सिर्फ कागजी आंकड़ों में नहीं, बल्कि धरातल पर भी दिखना चाहिए. ‘पीएम गतिशक्ति’ व ‘सागरमाला’ जैसी अम्ब्रेला योजनाओं के तहत सरकार ने विगत दस वर्षों में जिस प्रकार रेलवे, सड़क, हवाई अड्डे और बंदरगाह के रूप में नयी पीढ़ी की आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया है, उसके बड़े दूरगामी परिणाम रोजगार और आर्थिक विकास के स्तर पर होने वाले हैं. वैश्विक स्तर पर भी भारत की एक नयी छवि गढ़ने के लिए मोदी सरकार को याद किया जायेगा. केंद्र सरकार की नीतियों ने भारत को आज दुनिया के अग्रणी देशों में लाकर खड़ा कर दिया है. स्वदेश निर्मित वैक्सीन का निर्माण तथा ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’ के तहत कई देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर इस ‘नये भारत’ ने दुनिया को अपने उभरते हुए नवरूप का परिचय भी दिया है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 लायी गयी

विकसित भारत- 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए शिक्षा में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 लायी गयी, जिसकी पूरी दुनिया में प्रशंसा हो रही है. शिक्षा को समाज के आधारभूत अंग के रुप में स्वीकार करते हुए पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार द्वारा कई नये विश्वविद्यालय, आइआइटी, आइआइआइटी, आइआइएम आदि संस्थान स्थापित किये गये. पीएम श्री योजना के तहत 14,500 स्कूलों को उन्नत और विकसित किया गया. उपरोक्त उपलब्धियों के साथ-साथ नरेंद्र मोदी सरकार ने सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रूप से भी समाज को मजबूत किया है. शताब्दियों से दो समुदायों के बीच मतभेद का मुद्दा रहे राम मंदिर के निर्माण में पर्दे के पीछे रहकर जो भूमिका मोदी सरकार ने निभायी, वह सराहनीय है.

योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान मिली

योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिला कर और उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर और काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण कर सरकार ने सांस्कृतिक रूप से भारत के ‘सॉफ्ट पावर’ और ‘हार्ड पावर’ दोनों ही का उत्थान किया है. एक सरकार भले ही पांच वर्ष के लिए चुनी जाती है, लेकिन एक विजनरी सरकार का दृष्टिकोण सिर्फ पांच वर्षों का नहीं होना चाहिए. मोदी सरकार ने अपनी विजनरी दृष्टि, दृढ़ संकल्प और ईमानदार प्रयासों से यह सुनिश्चित कर दिया है कि आने वाले सिर्फ पांच या दस वर्ष ही नहीं, पूरी 21वीं सदी भारत के पुनरुत्थान की सदी होगी.-अन्नपूर्णा देवी

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