संपादकीय

‘मील पत्थर’ है व्यापार समझौता

भारत-ब्रिटेन ‘मुक्त व्यापार समझौता’ एक उदाहरण, एक नमूना बन सकता है, क्योंकि भारत अमरीका और यूरोपीय संघ के साथ भी ऐसे ही समझौतों पर बात कर रहा है। आज भारत विश्व की चौथी और ब्रिटेन छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे देशों के बीच ‘मुक्त व्यापार समझौता’ आपसी कारोबार, उद्योग, उत्पादन, निवेश और रोजगार के क्षेत्रों में ‘मील पत्थर’ साबित हो सकता है। भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय आधार पर बाजार खुलेंगे, लिहाजा उनके उत्पादों को एक बड़ा बाजार हासिल होगा। दोनों देशों के बीच फिलहाल करीब 56 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसे 2030 तक 120 अरब डॉलर (10 लाख करोड़ रुपए) तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। समझौते के तहत अधिकतर भारतीय उत्पादों के निर्यात को ‘शुल्क-शून्य’ रखा गया है। ब्रिटेन की मशहूर स्कॉच व्हिस्की पर भारत में 150 फीसदी आयात शुल्क को घटा कर 75 फीसदी किया गया है। अगले 10 साल में इसे 40 फीसदी तक लाया जाएगा। भारत के कृषि-क्षेत्र में बासमती, अंगूर, मसाले, अल्फांसो, मछली आदि उत्पादों का निर्यात 7000 करोड़ रुपए से बढक़र तीन साल में दोगुना हो जाएगा। वस्त्र पर 12 फीसदी शुल्क था, जो अब शून्य कर दिया गया है। बांग्लादेश, पाकिस्तान, कंबोडिया के वस्त्र उत्पादों पर पहले से ही शून्य शुल्क है। रत्न-आभूषण पर शुल्क 4 फीसदी था, जिसे अब शून्य कर दिया गया है। अब 8100 करोड़ रुपए का व्यापार 5 साल में दोगुना हो जाएगा। भारत अभी 8600 करोड़ रुपए के फार्मा उत्पाद ब्रिटेन को निर्यात करता है, लेकिन अगले तीन साल में तेजी आने की पूरी संभावनाएं हैं। भारत की 36 सेवा-क्षेत्रों में पहुंच बहुत आसान हो जाएगी। 400 भारतीय डॉक्टरों को भी प्रवेश मिल सकेगा। करीब 1800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीत से जुड़े प्रशिक्षकों को ब्रिटेन में सेवा देने का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि समझौते से भारत के युवाओं, पेशेवरों, किसानों, महिलाओं और उद्योगों को बहुत लाभ होगा। खासकर निर्यातकों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

हमारे समुद्री उत्पाद, विद्युत मशीनरी, फर्नीचर, खेल सामग्री, वाद्य यंत्र और घडिय़ां, चमड़ा/जूते, प्रसंस्कृत खाद्य, परिवहन और ऑटो, लकड़ी और कागज, फल, तिलहन, सब्जियां, अनाज, तेल, चाय, कॉफी आदि पर अब शुल्क शून्य होगा। इससे एमएसएमई उद्योगों द्वारा बनाए गए उत्पादों की ब्रिटेन के बाजारों तक आसान पहुंच संभव होगी। हालांकि डेयरी क्षेत्र में दूध, घी, मक्खन, पनीर आदि को रियायतों से बाहर रखा गया है। अनाज में गेहूं, चावल, मक्का, मोटा अनाज मसलन-ज्वार, बाजरा, रागी आदि को भी कोई रियायत नहीं दी गई है। फलों में सेब, अनानास, संतरे, अनार जैसे उत्पाद बाहरी सूची में रखे गए हैं। बहरहाल तीन साल की मशक्कत, आपसी संवाद, कारोबार की स्थितियों पर लंबे विमर्श के बाद यह समझौता संभव हो पाया है। किसी भी विकसित देश के साथ भारत का यह पहला ‘मुक्त व्यापार समझौता’ है। अमरीका के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। आम धारणा है कि भारत विदेशी वस्तुओं के आयात पर अधिक शुल्क वसूलता है। भारत की औसत शुल्क दर 17-19 फीसदी है। हालांकि कृषि उत्पादों पर 39 फीसदी तक शुल्क रहा है। इस करार के बाद ब्रिटिश उत्पादों पर 15 फीसदी से घटा कर मात्र 3 फीसदी शुल्क ही लगाया जाएगा। नतीजतन ब्रिटेन का निर्यात बढ़ेगा। भारत के 99 फीसदी से अधिक उत्पाद, ब्रिटेन के बाजार तक, ‘शुल्क-मुक्त’ पहुंच पाएंगे, लिहाजा भारत का निर्यात भी बढ़ेगा। भारत ने उस देश से करार किया है, जिसका वह करीब 200 साल तक ‘उपनिवेश’ रहा। गुलाम देश बनकर रहा। ब्रिटेन ने उस दौर में भारत के 45 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के धन, संसाधन, बेशकीमती सामान लूटे और अपने देश ले गया। यह राशि आज के अमरीका की कुल 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की डेढ़ गुना है। बहरहाल आज नया भारत है और नया ब्रिटेन है। हम कई मायनों में ब्रिटेन से बहुत आगे हैं। इस समझौते से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को विस्तार मिलेगा। यह करार आईटी, वित्तीय, कानूनी, पेशेवर और शैक्षिक सेवाओं के बाजार को भी विस्तार देगा। भारत-ब्रिटेन का व्यापार समझौता ऐसे समय आया है, जब टं्रप की ‘टैरिफ नीति’ ने दुनिया में हडक़ंप मचाया हुआ है।

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