महाराष्ट्र

महायुति के घटक दलों ने झगड़ा रोकने को खाई कसम, 90 मिनट तक साथ बैठे शिंदे-फडणवीस

मुंबई/नागपुर: महाराष्ट्र में एक बार फिर से महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण में कई स्थानों पर सत्तारूढ़ महायुति के घटक दल साथ नहीं लड़ पाए थे। गठबंधन टूट गया था। इतना ही नहीं कई स्थानों पर बीजेपी और शिवसेना के बीच तल्खी भी सामने आई थी, लेकिन महाराष्ट्र बीजेपी के प्रमुख रवींद्र चव्हाण के दिल्ली दौरे और वहां पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा के बाद अब दोनों दल एक साथ लड़ने को राजी को गए हैं। चव्हाण के दिल्ली दौरे का असर नागपुर में दिखाई दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच 90 मिनट की मंत्रणा हुई। ऐसा माना जा रहा है कि विपक्ष को पटखनी देने के लिए महायुति के तीनों प्रमुख दल एक साथ ही लड़ेंगे। स्थानीय निकाय के चुनावों में मुंबई बीएसमी के साथ इससे लगे नगर निगमों के चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं।

मीटिंग के बाद क्या बोले शिंदे?
मुख्यमंत्री से मीटिंग के साथ एकनाथ शिंदे ने कहा कि हम महायुति के तौर पर चुनाव लड़ेंगे, डेवलपमेंट के एजेंडे पर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल में सरकार के डेवलपमेंट के काम उनके कैंपेन का आधार होंगे। शिंदे के इस ऐलान के बाद एमवीए और महायुति में टक्कर होने की उम्मीद बंध गई है, हालांकि कांग्रेस क्या ठाकरे ब्रदर्स के साथ आने पर एमवीए में रहेगी अभी यह सरप्राइज बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस के पास विकल्प काफी सीमित हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्ष गठबंधन एमवीए के बीच मुकाबला होगा। महायुति में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) शामिल हैं, और अपोज़िशन महा विकास अघाड़ी, जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (UBT) (उद्धव ठाकरे गुट) और NCP (शरद पवार गुट या NCP-SP) और दूसरी चुनाव लड़ने वाली पार्टियां शामिल हैं।

टकराव वाले मुद्दे का निकाला हल
सूत्रों के अनुसार महायुति के घटक दलों ने एकता बनाए रखने के लिए अब एक दूसरे के नेताओं और कार्यकर्ताओं को नहीं लेने का फैसला किया है। महायुति के सहयोगियों ने एकता की कसम खाई है कि वे अब एकता टूटने वाला कोई काम नहीं करेंगे। शिवसेना के अनुससर दोनों पार्टियों ने महायुति के तौर पर मिलकर सिविक चुनाव लड़ने पर चर्चा की। दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि BJP और शिवसेना के कार्यकर्ताओं को पाला बदलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पहले इसी मुद्दे को लेकर महायुति में घमासान मच गया था। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण के नतीजे 21 दिसंबर को घोषित होंगे। इससे पहले निकाय चुनावों के अगले चरण के चुनावों का ऐलान हो सकता है।

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