राजनीति

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय समितियों पर सरकारों को दे दी बड़ी नसीहत, बोले- इनकी रिपोर्ट को रचनात्मक रूप से लें

नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को मुंबई में कहा कि संसदीय पैनल की रिपोर्ट को सरकारों को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। इसे केवल आलोचना के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने यह बात संसद और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की अनुमान समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में कही। बिरला ने कहा कि संसदीय समितियां सरकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में काम करती हैं। उनका मानना है कि सरकारों को समितियों की रिपोर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए। अधिकारियों को भी समय पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करनी चाहिए।

‘लोगों की उम्मीदों को आवाज देकर पूरा करना जरूरी’

बिरला ने कहा कि संसदीय समितियों के सदस्य सार्वजनिक सेवा का अच्छा अनुभव रखते हैं। वे विचार-विमर्श के दौरान अपना योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे संस्थापकों ने लोकतंत्र को सरकार से लोगों की उम्मीदों को जानने का एक तरीका माना था। उन्होंने कहा,’हमारे फाउंडिंग फादर्स ने लोकतंत्र को सरकार से लोगों की नब्ज और अपेक्षाओं को मापने के साधन के रूप में देखा’। चुने हुए प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन उम्मीदों को आवाज दी जाए और उन्हें पूरा किया जाए। बिरला ने यह भी कहा कि शासन में अधिक पारदर्शिता से केंद्र और राज्य सरकारों दोनों में बेहतर कामकाज होगा।

‘समिति की रिपोर्टों को रचनात्मक रूप से लेना चाहिए’

उन्होंने बताया कि अनुमान समिति की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में निगरानी को मजबूत करने के लिए एक प्रस्ताव अपनाया गया। इसमें बैठकों की न्यूनतम संख्या तय की गई। यह भी सहमति बनी कि रिपोर्ट की संख्या को मानकीकृत किया जाएगा। सदस्यों के लिए क्षमता-निर्माण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे ताकि बजट की जांच और वित्तीय विश्लेषण में सुधार हो सके। ओम बिरला ने कहा, ‘मेरा मानना है कि सरकारों को समिति की रिपोर्टों को रचनात्मक रूप से लेना चाहिए। अधिकारियों को भी इसे गंभीरता से लेना चाहिए और समय पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करना सुनिश्चित करना चाहिए।

महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने भी सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, विधान परिषद के सभापति राम शिंदे और उपसभापति नीलम गोर्हे समेत कई लोग उपस्थित थे। सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि बजट की बेहतर जांच के लिए सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे बजट और वित्त से जुड़े मामलों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। इससे सरकार के कामकाज में और अधिक पारदर्शिता आएगी।

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