बैसाखी 13 या 14 किस तारीख को है, जानें वैशाख संक्रांति का महत्व

बैसाखी खुशियों और नई शुरुआत का पर्व है। बैसाखी का दिन किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है। बैसाखी आने तक रबी की फसल पक जाती है। ऐसे में किसान अपनी फसलों की कटाई की खुशी में बैसाखी मनाते हैं। इसके अलावा बैसाखी सूर्यदेव की स्तुति का भी विशेष दिन माना जाता है क्योंकि जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। इस साल बैसाखी 13 अप्रैल, रविवार को है। बैसाखी को वैशाख संक्रांति नाम से भी जाना जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं बैसाखी की तिथि, मुहूर्त और पुण्यकल।
बैसाख संक्रांति की तिथि, समय, मुहूर्त और पुण्यकाल 2024 :
बैसाख संक्रांति यानी मेष संक्रांति इस साल 13 अप्रैल, रविवार को है। पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल की सुबह 5 बजकर 52 मिनट से बैसाख कृष्ण पक्ष यानी प्रतिपदा तिथि का आरंभ हो रहा है। इस दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर करेंगे। सूर्य का मेष राशि में गोचर 13 तारीख की मध्यरात्रि 3 बजकर 21 मिनट पर होगा। इसे बैसाखी नाम से भी जाना जाता है। वहीं, पुण्यकाल की बात करें, तो जब सूर्य मेष राशि में जाएंगे, तो स्नान-दान का आरंभ होगा यानी पुण्यकाल की तिथि 14 अप्रैल है। आप सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर स्नान-दान कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दान करने के लिए हर समय श्रेष्ठ होता है इसलिए आप वैशाख संक्रांति के आरम्भ और पुण्यकाल दोनों ही समय पर दान-पुण्य कर सकते हैं।
बैसाखी, वैशाख संक्रांति या मेष संक्रांति का महत्व
वैशाख संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा और दान का महत्व है। इसे नया साल मानते हैं। सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहते हैं इसलिए उनके राशि बदलने का असर सब पर होता है। मेष संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में अच्छी ऊर्जा आती है। यह दिन किसानों के लिए खास है क्योंकि इस दिन फसल कटाई शुरू होती है। सूर्यदेव की स्तुति के साथ वैशाख संक्रांति पर भगवान शिव और देवी काली की पूजा भी की जाती है।



