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सच नहीं है भारत पर ट्रंप का एकतरफा व्यापार का आरोप, जानिए कहां-कहां से होती है अमेरिका को कमाई

भारत पर टैरिफ (Trump Tariffs) को वाजिब बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार को एकतरफा बताया है। उनका दावा है कि भारत अमेरिका के साथ बहुत अधिक व्यापार करता है अमेरिका का व्यापार बहुत कम है। लेकिन यह बात सिर्फ वस्तु निर्यात तक सीमित है। दोनों देशों के बीच सभी तरह के बिजनेस को शामिल किया जाए तो अमेरिका काफी सरप्लस में है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सोशल मीडिया ट्रुथ पर भारत के खिलाफ लिखा है। उन्होंने 1 सितंबर को अपने पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका, भारत के साथ बहुत कम व्यापार करता है, जबकि भारत का वाशिंगटन के साथ व्यापार बहुत अधिक है। उन्होंने व्यापारिक संबंधों को एकतरफा करार दिया, भारत पर दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ लगाने का आरोप लगाया, कहा कि यह असंतुलन दशकों से कायम है। अमेरिका के बजाय रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए भारत की एक बार फिर आलोचना भी की।

35-40 अरब डॉलर सरप्लस में है अमेरिका

हालांकि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को समग्र रूप से देखा जाए तो बिल्कुल अलग कहानी सामने आती है। अमेरिका वास्तव में भारत की तुलना में कहीं ज्यादा कमाता है। वस्तु व्यापार में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा भले 45 अरब डॉलर का है, लेकिन सभी तरह के बिजनेस को मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका भारत के साथ 35-40 अरब डॉलर का अच्छा-खासा सरप्लस रखता है।

कहां-कहां से होती है अमेरिका को कमाई

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) ने बताया है कि अमेरिका कहां-कहां से कमाई कर रहा है, जिनका जिक्र ट्रंप अपने बयानों में नहीं करते हैं। गूगल, मेटा, अमेजन, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी दिग्गज टेक कंपनियां भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था से सालाना 15-20 अरब डॉलर कमाती हैं; मैकडॉनल्ड्स, कोका कोला और सैकड़ों अन्य अमेरिकी कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशंस से 15 अरब डॉलर से ज्यादा कमाती हैं, अमेरिका बैंकों और कंसल्टेंसी फर्मों की आय 10-15 अरब डॉलर की है, वॉलमार्ट, आईबीएम, डेल और अन्य के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) 15-20 अरब डॉलर की कमाई करते हैं; दवा के पेटेंट, हॉलीवुड फिल्मों, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए भी अरबों डॉलर आते हैं। इन सबके अलावा, अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्र हर साल ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों के रूप में 25 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान करते हैं।

भारत ने रखा है 95% आयात शुल्क मुक्त करने का प्रस्ताव

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव टैरिफ पर ट्रंप के आरोपों (Trump Tariffs) को भी बेमानी बताते हैं। हालांकि दोनों देशों सरकारें व्यापार वार्ता की प्रगति पर चुप हैं, लेकिन समझा जाता है कि भारत ने एक व्यापक रियायत की पेशकश की है। भारत ने सभी औद्योगिक वस्तुओं और बादाम व सेब जैसी चुनिंदा कृषि वस्तुओं पर आयात शुल्क नहीं लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह सब मिलाकर भारत को होने वाले अमेरिकी निर्यात का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनता है। इस तरह वाशिंगटन को भारतीय बाजार में एक तरह से टैरिफ-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी।

पीयूष गोयल बोले, द्विपक्षीय व्यापार पर बातचीत जारी

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत कर रहा है। भारत और अमेरिका के बीच मार्च से इस समझौते पर बातचीत चल रही है। अब तक पांच दौर की वार्ता हुई हैं। 27 अगस्त से 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद अमेरिकी टीम ने अगले दौर की वार्ता के लिए भारत का अपना दौरा स्थगित कर दिया जो 25 अगस्त से शुरू होने वाली थी। अभी तक छठे दौर की वार्ता के लिए कोई नई तारीख तय नहीं हुई है।

ये है ट्रंप के बयान की असली वजह

श्रीवास्तव के अनुसार, “कई पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि भारत के खिलाफ ट्रंप का लगातार हमला व्यापार से कम और उनके आहत अहंकार से अधिक जुड़ा है। भारत और पाकिस्तान के बीच हाल की लड़ाई रोकने में भूमिका निभाने के उनके अतिरंजित दावों का भारत ने बार-बार खंडन किया है। इससे शायद उनके अहंकार को चोट पहुंचा होगा। उन्हें उम्मीद थी कि यह नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनके दावे को मजबूत कर सकता है।”

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