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पता चल गया किसने बनाया था गीजा का पिरामिड, नई खोज में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Great Pyramid of Giza: पुरातत्वविदों ने मिस्र के महान पिरामिड के अंदर एक बेहद अहम खोज की है। इससे यह पुष्टि हो गई है कि 4,500 साल पहले इस स्मारक का निर्माण वास्तव में किसने किया था? पुरातत्वविदों की नई खोज से 4,500 साल पहले बने दुनिया के इस अजूबे के असली निर्माताओं की पुष्टि हुई है।

दुनिया के सात अजूबों में शामिल गीजा के विशाल पिरामिड के निर्माण को लेकर आए दिन चर्चा होती है। आखिर इतने विशाल संरचना को इतनी सटीकता से किसने बनाया? वर्षों से इस सवाल का जवाब खोजने की कोशिश की जा रही है। अब तक माना जाता रहा है कि पिरामिड के निर्माण कई वर्ष लगे होंगे। मिस्र के फराहो ने गुलामों  से इसका निर्माण कराया होगा। अब नई खोज में खुलासा हुआ है कि इसको बनाने में गुलामों का इस्तेमाल नहीं किया गया था। गीजा के महान पिरामिड के भी कुछ असाधारण खोज से जानकारी मिली है कि इन्हें वास्तव में किसने बनाया था। 

पुरातत्वविदों ने मिस्र के महान पिरामिड के अंदर एक बेहद अहम खोज की है। इससे यह पुष्टि हो गई है कि 4,500 साल पहले इस स्मारक का निर्माण वास्तव में किसने किया था? पुरातत्वविदों की नई खोज से 4,500 साल पहले बने दुनिया के इस अजूबे के असली निर्माताओं की पुष्टि हुई है। प्राचीन यूनानी स्रोतों से मिले कुछ संकेतों से अभी तक दावा किया जाता रहा है कि गुलामों ने इसका निर्माण किया होगा। 

पिरामिड के अंदर कुछ कब्रें मिली है, जिसके आधार यह खोज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसिद्ध इजिप्टोलॉजिस्ट डॉ. जाही हवास और उनकी टीम कई साल से मिस्र के पिरामिड का अध्ययन कर रही है। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी खोज की है जिससे पता चला है कि दुनिया के इस अजूबे का निर्माण एक लाख गुलामों द्वारा नहीं, बल्कि वहां कठोर शासन के तहत काम करने वाले अत्यंत कुशल, पेशेवर और वेतनभोगी मजदूरों ने किया था। 

डॉ. जाही हवास और उनकी टीम ने हाल ही में इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया और राजा के कक्ष के ऊपर संकीर्ण कक्षों की एक श्रृंखला का अन्वेषण किया। इसमें उन्हें 13वीं शताब्दी ईसा पूर्व के कार्यदलों द्वारा छोड़े गए कुछ ऐसे चिह्न मिले, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। पिरामिड के दक्षिण में कुछ कब्रें मिली है, जो कुशल श्रमिकों के अंतिम स्थल हैं। इनमें पत्थरों को काटते हुए श्रमिकों की मूर्तियां और पिरामिड के किनारे के पर्यवेक्षक और शिल्पकार की 21 चित्रलिपि उपाधियां भी मिली हैं। 

गुलामों ने नहीं बनाया पिरामिड

डॉक्टर जाही हवास ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उनकी खोज के निष्कर्षों से पुष्टि होती है कि गुलामों ने गीजा के पिरामिड को नहीं बनाया था। उन्होंने कहा कि अगर वे गुलाम होते तो उन्हें पिरामिडों के बगल में कभी नहीं दफनाया जाता। इनकी कब्रों में औजारों को रखा गया और इनके नाम भी गुदवाए गए। यह इनके प्रति शासन की ओर से दिखाए गए सम्मान को दिखाता है। यह सम्मान गुलामों को लिए संभव ही नहीं था।

उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि ये पिरामिड बनाने वालों का उस वक्त के शासन तक संपर्क था। इस नई खोज ने उस पुरानी धारणा को खारिज कर दिया है, जिसमें गुलामों से गीजा पिरामिड के निर्माण कराए जाने की बात कही जाती है। ऐसे में इस पर आने वाले समय में कुछ और दावे किए जा सकते हैं। 

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