राजनीति

इजरायल एक राष्ट्र का सफाया कर रहा है, लेकिन हम चुप हैं… UN में गाजा वोटिंग को लेकर कांग्रेस का सरकार पर निशाना

नई दिल्लीःसंयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गाजा में तत्काल और स्थायी युद्धविराम के प्रस्ताव पर भारत ने वोट नहीं दिया। इस पर कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की है। 149 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, लेकिन भारत उन 19 देशों में शामिल था जिन्होंने वोट नहीं दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, पवन खेड़ा और के सी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भारत के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति से भटकाव बताया है। खरगे ने कहा कि भारत की विदेश नीति “बर्बाद” हो गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बार-बार हो रही गलतियों” की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। प्रियंका गांधी ने भारत के UN में वोट न देने को “शर्मनाक और निराशाजनक” बताया है। पवन खेड़ा ने इसे “नैतिक साहस की कमी” कहा है। भारत के UN में वोट न देने पर विवाद हो रहा है।

भारत की विदेश नीति अब सही नहीं

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति अब सही नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इस बारे में जवाब मांगा है। खरगे ने कहा कि 149 देशों ने गाजा में युद्ध रोकने के लिए UN में प्रस्ताव रखा, लेकिन भारत उन 19 देशों में था जिसने वोट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस वजह से भारत दुनिया में अकेला पड़ गया है।

UN में भारत का वोट न देना शर्मनाक

केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि UN में भारत का वोट न देना शर्मनाक है। उन्होंने कहा, “यह हमारे उपनिवेशवाद विरोधी इतिहास से दुखद बदलाव है। हम चुपचाप खड़े हैं जब नेतन्याहू एक पूरे देश को खत्म कर रहे हैं। हम उनकी सरकार को ईरान पर हमला करते और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए देख रहे हैं।” भारत सरकार गलत काम होते हुए देख रही है और कुछ नहीं कर रही है।

मोदी सरकार में नैतिक साहस की कमी

पवन खेड़ा ने सरकार के इस फैसले को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह “नैतिक साहस की कमी” दिखाता है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत उन पहले देशों में से था जिन्होंने 1974 में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) को मान्यता दी थी। 1983 में भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन में यासर अराफात की मेजबानी की थी। 1988 में फिलिस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता दी थी। खेड़ा ने सरकार पर दिसंबर 2024 में लिए गए अपने फैसले को बदलने का आरोप लगाया। उस समय भारत ने युद्ध रोकने के लिए वोट किया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता भाषणों में फिलिस्तीन के लिए समर्थन दिखाते हैं, लेकिन उनके काम कुछ और ही बताते हैं।

के सी वेणुगोपाल ने भी कहा कि भारत हमेशा शांति, न्याय और सम्मान के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया, BRICS और SCO में भारत अकेला ऐसा देश था जिसने वोट नहीं दिया, जबकि वहां मानवीय संकट बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि छह महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि भारत ने युद्ध रोकने का समर्थन करने के बजाय वोट ही नहीं दिया। वेणुगोपाल ने कहा, “हम जानते हैं कि इस सरकार को नेहरू जी की विरासत की परवाह नहीं है, लेकिन वाजपेयी जी के फिलिस्तीन पर सिद्धांतों को क्यों छोड़ दिया?” इसका मतलब है कि सरकार न तो पहले के नेताओं की सुन रही है और न ही अपने ही सिद्धांतों पर चल रही है।

भारत के UN में स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि भारत का वोट न देना पहले के वोटों जैसा ही है। उन्होंने कहा कि भारत बातचीत और शांति से समस्या का समाधान निकालने में विश्वास रखता है। अमेरिका, इजराइल और 10 अन्य देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे अमेरिका के सहयोगी देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

इस पूरे मामले में कांग्रेस सरकार पर हमला कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने भारत की विदेश नीति को कमजोर कर दिया है। वहीं, सरकार का कहना है कि उसने सोच-समझकर ही वोट नहीं दिया है। सरकार का मानना है कि बातचीत से ही इस समस्या का समाधान हो सकता है।

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