अंतर्राष्ट्रीय

ईरान का वो अमोघ अस्‍त्र, जिससे बचने में निकल रहा अमेरिका-इजरायल का दिवाला, रूस इसका खरीदार

Iran Shahed-136 Drones: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव अब केवल सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि सामरिक और रणनीतिक युद्ध भी बनता जा रहा है. एक ओर जहां ईरान के सस्ते ड्रोन पश्चिमी ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को उन्हें गिराने या इंटरसेप्‍ट करने के लिए करोड़ों रुपये कीमत वाली अत्याधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. ईरान के Shahed-136 ड्रोन की कीमत करीब 20,000 डॉलर (18 लाख रुपये) बताई जाती है. यह ड्रोन अपेक्षाकृत सरल तकनीक पर आधारित हैं और बड़े पैमाने पर तैयार किए जा सकते हैं. इसके विपरीत अमेरिकी Patriot Missile System की एक PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लगभग 40 लाख डॉलर यानी तकरीबन 37 करोड़ रुपये है. इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका और इजरायल को 18 लाख रुपये के खतरे से बचने के लिए 37 करोड़ का आग में झोंकना पड़ रहा है. यूक्रेन से लड़ाई में रूस शाहेद-136 ड्रोन का धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम ने 90 प्रतिशत से अधिक ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सफलता हासिल की है. तकनीकी रूप से यह बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आर्थिक दृष्टि से यह संतुलन पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते हथियारों के जरिए महंगे इंटरसेप्टरों को खत्म करना ईरान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. स्टिमसन सेंटर की वरिष्ठ फेलो केली ग्रीको के मुताबिक, ईरान एट्रिशन स्ट्रेटेजी अपना रहा है यानी लगातार हमले कर प्रतिद्वंद्वी के संसाधनों और राजनीतिक इच्छाशक्ति को कमजोर करने की नीति. रिपोर्टों के मुताबिक, कतर के पास मौजूद पैट्रियट इंटरसेप्टर मौजूदा इस्तेमाल दर पर सिर्फ चार दिन तक चल सकते हैं. हालांकि, कतर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया कार्यालय ने दावा किया है कि उसके भंडार पर्याप्त हैं और खत्म नहीं हुए हैं. फिर भी खाड़ी देशों पर दबाव बढ़ रहा है कि वे संघर्ष का जल्द समाधान तलाशें.अमेरिका के पास पर्याप्‍त संसाधन हैं?

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह इराक नहीं है, यह अंतहीन युद्ध नहीं होगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका के पास लंबा अभियान चलाने के लिए पर्याप्त मिसाइलें तैनात हैं? ‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, Lockheed Martin ने वर्ष 2025 में लगभग 600 PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्माण किया. लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद हजारों इंटरसेप्टर पहले ही दागे जा चुके होने की आशंका जताई जा रही है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के पास THAAD प्रणाली भी है, जो वायुमंडल के बाहर तेज गति वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए बनाई गई है. लेकिन इसकी प्रत्येक मिसाइल की कीमत लगभग 1.2 करोड़ डॉलर है, जो पैट्रियट से भी अधिक महंगी है. कुछ मामलों में लड़ाकू विमानों से एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम (APKWS) मिसाइलों का इस्तेमाल कर ड्रोन गिराए गए हैं. इनकी कीमत 20,000 से 30,000 डॉलर के बीच है, लेकिन इसमें विमान की उड़ान लागत शामिल नहीं है.

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