अंतर्राष्ट्रीय

ईरान ने कर दिया बड़ा वार, बूंद-बूंद को तरसेगी खाड़ी

तेहरान। ईरान-अमेरिका की लड़ाई के बीच खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। अब तक ईरान जहां अमरीका के सैन्य ठिकानों पर चुन-चुनकर हमले कर रहा था, वहीं अब उसने टारगेट बदलते हुए पहली बार बहरीन में समुद्री पानी को साफ करने वाली डीसैलिनेशन यानी नमक हटाने वाले प्लांट को निशाना बनाया है। शुरुआत सात मार्च को अमरीका और इजरायल की ईरान के दक्षिणी केश्म द्वीप पर स्थित एक वॉटर प्लांट पर हमले से हुई, जिससे 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हो गई थी। अब ईरान ने इसका बदला लेते हुए बहरीन में मौजूद पानी के प्लांट को टारगेट किया है। ईरान ने पहले बहरीन में अमरीकी नौसेना बेस पर हमला किया और फिर एक ईरानी ड्रोन ने बहरीन के डिसेलिनेशन प्लांट को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसमें तीन लोगों के जख्मी होने की भी खबर है। बहरीन ने इसे संघर्ष का नया चरण बताया, क्योंकि खाड़ी देश पानी के शुद्धिकरण पर ज्यादा निर्भर हैं।

यह घटना क्षेत्रीय जल सुरक्षा को खतरे में डाल रही है, जहां ये संयंत्र लोगों की मूलभूत आवश्यकता को पूरा करते हैं. इसे नुकसान पहुंचने से खाड़ी में पानी का संकट जरूर आएगा। इससे पहले, ईरान ने दुबई के जबेल अली बंदरगाह और अन्य ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए थे, जो वॉटर प्लांट के पास थे, लेकिन अब सीधे निशाना बनाना एक नई रणनीति को जन्म देता है, जो और भी ज्यादा घातक है। बता दें कि पर्शियन गल्फ के तट पर सैकड़ों डीसैलिनेशन प्लांट लगे हुए हैं। ये प्लांट समुद्री पानी से नमक अलग करके पीने लायक पानी बनाते हैं। अगर इन प्लांट्स को नुकसान पहुंचता है, तो खाड़ी के कई बड़े शहरों में पानी की भारी किल्लत हो सकती है। खाड़ी देशों की पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी डीसैलिनेशन तकनीक से पूरा होता है। कुवैत में करीब 90 फीसदी पीने का पानी डीसैलिनेशन से आता है। ओमान में यह आंकड़ा लगभग 86 फीसदी है, जबकि सऊदी अरब में करीब 70 फीसदी पीने का पानी डीसैलिनेशन से तरीके से तैयार किया जाता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर पानी के प्लांट्स को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है, तो इससे खाड़ी मुल्क जंग में शामिल होने के लिए भी मजबूर हो सकते हैं। दूसरी तरफ ईरान खुद डीसैलिनेशन पर ज्यादा निर्भर नहीं है। वहां पानी का ज्यादातर हिस्सा नदियों, बांध और भूजल से आता है, लेकिन लंबे समय तक सूखे की वजह से तेहरान के जलाशयों का स्तर भी खतरनाक रूप से घट गया है।

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