17 लाख करोड़ के घाटे का अंतरिम बजट; न इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव, न बढ़ी किसान निधि

नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को करीब 17 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटे घाटे का अंतरिम बजट पेश किया। वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट में कराधान व्यवस्था को यथावत बनाए रखने की परंपरा का पालन करते हुए कहा कि अगले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार की कमाई 30.80 लाख करोड़ (उधारी छोडक़र) और खर्च 47.66 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इस प्रकार बजट में करीब 17 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटा बताया गया है, जो जीडीपी का 5.1 प्रतिशत रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में सरकार को टैक्स कलेक्शन से कुल 26.02 लाख करोड़ मिलने का अनुमान है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी बजट से लोगों को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन यह अंतरिम ही रहा। बजट में टैक्स स्लैब नहीं बदला गया और न ही एमएसपी का दायरा बढ़ा।
चुनावी बजट में उम्मीदों के अनुरूप किसान सम्मान निधि की राशि भी नहीं बढ़ाई गई। वित्त मंत्री करीब 58 मिनट बोलीं। इस दौरान सबसे ज्यादा 42 बार टैक्स और इतनी ही बार पीएम शब्द दोहराए। पर डायरेक्ट या इंडायरेक्ट, किसी भी तरह के टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया। हां, पीएम के नाम से शुरू होने वाली योजनाएं खूब सारी गिनाईं। सीतारमण ने बजट भाषण में सरकार के कामों और उसके प्रति मजबूत जनविश्वास को रेखांकित करते हुए कहा कि आम चुनाव के बाद नई सरकार द्वारा जुलाई में पेश किए जाने वाला बजट ‘विकसित भारत का रोडमैप’ होगा।
यह बजट 2047 के भारत की नींव मजबूत करेगा
बजट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह बजट विकसित भारत के युवा, गरीब, महिला और किसान पर आधारित है। यह देश के निर्माण का बजट है। इसमें 2047 के भारत की नींव को मजबूत करने की गारंटी है। मैं निर्मला जी और उनकी टीम को बहुत बधाई देता हूं। इसमें भारत की यंग एस्पिरेशन का प्रतिबिंब है।
खडग़े बोले, महज काम चलाने के लिए है बजट
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि इस बजट में गरीबों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए कुछ भी नहीं है। सिर्फ काम चलाने के लिए यह बजट है। भाजपा कहती है कि हमने देश में बहुत कार्य किए हैं, लेकिन उसका कोई जिक्र नहीं और भाजपा ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं। इस बजट में कुछ भी नहीं है। बजट से आम जनता को निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला है।
डिफेंस बजट सबसे ज्यादा बढ़ा, कृषि का सबसे कम
भारत का डिफेंस बजट अब 6.20 लाख करोड़ रुपए हो गया है। पिछले साल डिफेंस बजट 5.93 लाख करोड़ रुपए था। यानी इस बार डिफेंस बजट में 3.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि एग्रीकल्चर सेक्टर को 1.27 लाख करोड़ रुपए ही दिए गए हैं। यह पिछले साल के मुकाबले केवल 2,000 करोड़ रुपए ज्यादा यानी 1.6 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल एग्रीकल्चर बजट के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए दिए थे। इसके अलावा बजट में एमएसपी को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई।
न कुछ सस्ता हुआ, न ही महंगा
इस बार बजट में कुछ भी सस्ता या महंगा नहीं हुआ है। ऐसा इसलिए, क्योंकि 2017 में लागू किए गए जीएसटी के बाद से बजट में केवल कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाया या घटाया जाता है, जिसका असर गिनी-चुनी चीजों पर पड़ता है। इस बार बजट में सरकार ने कस्टम ड्यूटी या एक्साइज ड्यूटी में कोई भी बदलाव नहीं किया है।
टूरिज्म के लिए राज्यों को मिलेगा इंटरेस्ट फ्री लोन
राज्यों को प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों को विकसित करने, ग्लोबल लेवल पर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता के आधार पर केंद्रों की रेटिंग के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। इसके लिए राज्यों को 50 साल के लिए एक लाख करोड़ का ब्याज मुक्त लोन दिया जाएगा। बजट के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए राज्यों में कई विकास और विकास सक्षम सुधारों की आवश्यकता है।



