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भारत पर आज से 50% ट्रंप टैरिफ, 55% निर्यात पर पड़ेगा असर; एक्सपोर्टर्स को लगेगा बड़ा झटका

वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अपने कुल निर्यात का पांचवां हिस्सा यानी करीब 86.5 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का अमेरिका को निर्यात किया था।

भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 27 अगस्त सुबह साढ़े नौ बजे से अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क लागू हो जाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने इसकी पु​ष्टि की है। इससे पहले 7 अगस्त से 25 फीसदी का शुल्क प्रभावी है जिससे कुल मिलाकर अमेरिका में भारत के निर्यात पर 50 फीसदी शुल्क लगेगा। सरकार का अनुमान है कि अमेरिका को भारत से होने वाले वस्तुओं का निर्यात 55 फीसदी या 47 से 48 अरब डॉलर तक प्रभावित हो सकता है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अपने कुल निर्यात का पांचवां हिस्सा यानी करीब 86.5 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का अमेरिका को निर्यात किया था।

निर्यातकों के संगठन फियो ने कहा कि तिरुपुर, नोएडा और सूरत में कपड़ा और परिधान विनिर्माताओं ने लागत प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने के कारण उत्पादन रोक दिया है। फियो ने कहा, ‘यह क्षेत्र वियतनाम और बांग्लादेश से आने वाले कम लागत वाले उत्पादों से पिछड़ रहा है। समुद्री उत्पाद, विशेष रूप से झींगे का निर्यात काफी प्रभावित होगा क्योंकि भारत से निर्यात होने वाले कुल सीफूड का 40 फीसदी अमेरिकी बाजार में भेजा जाता है। ऐसे में शुल्क वृद्धि से आपूर्ति श्रृंखला के साथ ही मछुआरों-किसानों के प्रभावित होने की आशंका है।

अमेरिकी सरकार ने कहा कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क उसके द्वारा रूसी तेल खरीद का परिणाम है क्योंकि इससे यूक्रेन युद्ध के लिए धन जुटाने में मदद मिल रही है। इस शुल्क को तीन साल से भी लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए दबाव रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

अमेरिकी प्रशासन की अ​धिसूचना के अनुसार, ‘ यह शुल्क उन भारतीय उत्पादों पर लागू होगा जिन्हें 27 अगस्त को ‘ईस्टर्न डेलाइट टाइम’ (ईडीटी) के अनुसार रात 12 बजकर एक मिनट या उसके बाद उपभोग के लिए अमेरिका लाया गया है या गोदाम से निकाला गया है।’ स्टील, एल्युमीनियम, तांबा, वाहन जैसे क्षेत्र जहां सभी देशों के लिए पहले से ही अतिरिक्त शुल्क लागू हैं और फार्मास्युटिकल्स तथा इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को इन जवाबी शुल्क से छूट दी गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सबसे पहले 6 अगस्त को अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी और बातचीत के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी थी। इस दौरान ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के प्रधानमंत्री वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ त्रिपक्षीय बैठकें भी कीं।

भारत रूसी तेल की खरीद के संबंध में अपने रुख पर दृढ़ रहा है। भारत ने अमेरिकी शुल्क को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया है और कहा कि जहां से भी सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, भारतीय कंपनियां वहां से तेल खरीदना जारी रखेंगी। अ​धिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि 50 फीसदी के भारी शुल्क के साथ अमेरिका के साथ व्यापार करना काफी हद तक संभव नहीं है।

निर्यातकों को नए बाजार तलाशने होंगे। सरकार ने निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने, निर्यात संवर्धन और निर्यात बास्केट तथा बाजार के विवि​धिकरण को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है। प्रस्तावित निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत विभिन्न सहायता योजनाओं के माध्यम से निर्यातकों की मदद को वित्त मंत्रालय से अगले एक या दो सप्ताह में मंजूरी मिल सकती है। भारत निर्यात के शीर्ष 50 देशों पर भी ध्यान दे रहा है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रिपोर्ट में कहा, ‘यह रणनीतिक झटका है जो अमेरिकी बाजार में भारत की लंबे समय से चली आ रही पकड़ को खतरे में डालता है। इससे भारत के निर्यात केंद्रों में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का खतरा पैदा हो सकता है। यह वै​श्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी को कमजोर कर सकता है। चीन, वियतनाम, मेक्सिको, तुर्किये और यहां तक कि पाकिस्तान, नेपाल, ग्वाटेमाला और केन्या जैसे प्रतिस्प​र्धियों को लाभ होने की संभावना है।’

जीटीआरआई की रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपात ऋण, अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता और लंबे समय के नुकसान को रोकने के लिए यूरोपीय संघ, यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर तत्काल ध्यान देने का आह्वान किया गया है। निर्यातकों ने कहा कि शुल्क का प्रभाव निर्यात के नुकसान के साथ ही नकदी प्रवाह पर भी पड़ेगा। तत्काल कारखानों को चालू रखने के उपाय करना और कामगारों को वेतन देना सबसे बड़ी चिंता है। निर्यातक भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क कर कर्ज को लेकर अपनी चिंता से अवगत कराएंगे।

चमड़ा, सिरेमिक, रसायन, हथकरघा और कालीन सहित अन्य श्रम बहुल क्षेत्र को भी संकट का सामना करना पड़ेगा। फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन के अनुसार इन क्षेत्रों में ऑर्डर में देरी, पहले के ऑर्डर रद्द कराने और लागत में बढ़त का लाभ खत्म होने का संकट बढ़ गया है।

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