राष्ट्रीय

निर्यात में वृद्धि

निर्यात में बढ़ोत्तरी से यह साबित होता है कि विश्व बाजार में भारत की साख बढी है। यह देशवासियों के लिए गौरव की बात कही जा सकती है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी बल्कि देश को आर्थिक मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी।

वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का निर्यात (वस्तु एवं सेवाएं) 200 अरब डॉलर से अधिक रहा है. इस उत्साहजनक आंकड़े के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष कुल निर्यात 800 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है. किसी भी तिमाही में सर्वाधिक निर्यात का यह एक नया रिकॉर्ड है. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 184.5 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भू-राजनीतिक तनावों एवं संघर्षों का साया बना हुआ है तथा बड़ी लड़ाइयों की आशंका भी बढ़ती जा रही है, पर वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर आशाएं भी हैं तथा मुद्रास्फीति में भी सुधार के संकेत हैं. भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के बढ़ते निर्यात से यह स्पष्ट रूप से इंगित होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी गुणवत्ता में भरोसा बढ़ रहा है.

सबसे अधिक गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होने के नाते वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भी भारत का योगदान बढ़ता जा रहा है. निर्यात में निरंतर वृद्धि के पीछे कई कारक हैं. हाल के वर्षों में हुए व्यापक आर्थिक सुधारों ने कारोबारी सुगमता को बढ़ाया है. निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए प्रखंड स्तर तक नेटवर्क स्थापित किये गये हैं. गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा विदेशी साझेदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत ने महत्वपूर्ण 20 देशों को चिह्नित किया है तथा छह ऐसे बड़े क्षेत्रों को चुना गया है, जिससे लक्ष्य-आधारित निर्यात बढ़ सके. इन क्षेत्रों में इंजीनियरिंग वस्तुएं, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाएं, रसायन एवं प्लास्टिक तथा कृषि एवं संबंधित उत्पाद. इन क्षेत्रों में भारत का पहले से व्यापक अनुभव है तथा बड़े पैमाने पर उत्पादन की संभावनाएं भी हैं. वैश्विक उत्पादन शृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने को भारत ने प्राथमिकताओं में शामिल किया है.

निर्यात और आयात के बीच परस्पर संबंध होता है. उत्पादन बढ़ाने के लिए बाहर से विभिन्न चीजों को खरीदना पड़ता है. घरेलू उत्पादन बढ़ने का एक नतीजा आमदनी बढ़ने के रूप में भी सामने आता है, जिससे मांग बढ़ती है. इसकी पूर्ति के लिए भी आयात आवश्यक हो जाता है. इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 172.23 अरब डॉलर की वस्तुओं का आयात हुआ, जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 160.05 अरब डॉलर रहा था. हम अपनी ऊर्जा जरूरतों, तकनीक, दवा उद्योग के लिए आवश्यक वस्तुओं, कंप्यूटर, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल उपकरण, खाद्य तेल, दाल आदि के लिए आयात पर निर्भर हैं. आशा है कि निकट भविष्य में उत्पादन बढ़ाकर हम व्यापार घाटे को बहुत हद तक पाट सकेंगे.

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