छह सालों में ग्रामीण किशोरियों और महिलाओं की रोजगार दर में इजाफा

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) एक सर्वे है जिसकी मदद से देश में रोजगार की स्थिति का पता लगाया जाता है। इस सर्वे के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2023-जून 2024 में ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, बीते 6 सालों में ग्रामीण महिलाओं की रोजगार (Employment) में भागीदारी दर को 18.2 फीसदी से बढ़ाकर 35.5 फीसदी हो गई है। वहीं, शहरी महिलाओं की भागीदारी दर में मामूली बढ़ोतरी हुई है। अवधि के दौरान शहरी महिलाओं की रोजगार भागीदारी 15.9 फीसदी से 22.3 फीसदी तक पहुंची।
कृषि में बढ़ी भागीदारी
बिजनेस लाइन में छपे अपने लेख में किरण बताते हैं कि ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र से आ रहा है। सरकार की उज्ज्वला योजना और हर घर जल योजना जैसे कदमों ने घरेलू कामों का बोझ कम कर दिया है। इससे महिलाओं को खेतों में काम करने का अधिक समय मिला है। लेकिन, इन आंकड़ों का उम्र के स्तर पर विश्लेषण को किरण जरूरी बताते हैं।
ग्रामीण किशोरियां और वरिष्ठ महिलाएं: श्रम शक्ति में बढ़ती भागीदारी का नया दौर
15 से 19 उम्र की ग्रामीण किशोरियों की श्रम में भागीदारी दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दर 2017-18 में 5 फीसदी थी। लेकिन, 2023-24 में यह 15 फीसदी पहुंच गई है। यह आंकड़े चिंताजनक भी हैं। क्योंकि इस आयु वर्ग के युवाओं को अपनी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, परिवार की कम कमाई के के कारण किशोरियों को श्रम बल में शामिल होना पड़ता है। इसके साथ 60 वर्ष से अधिक उम्र की ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। वरिष्ठ महिलाओं की बढ़ती रोजगार में भागीदारी आर्थिक दबाव को दिखती है।
बढ़ती भागीदारी कई सवाल भी पीछे छोड़ती है
आंकड़ों के अनुसार, श्रम बल में सक्रिय वरिष्ठ ग्रामीण महिलाएं अधिकतर परिवार की मुखिया होती हैं। इसका मतलब है कि इन महिलाओं का श्रम भागीदारी अक्सर आर्थिक आवश्यकता से प्रेरित है, न कि अपनी स्वतंत्र इच्छा से। विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि यह बदलाव किस हद तक महिलाओं की स्वायत्तता को दर्शाता है और किस हद तक यह आर्थिक मजबूरी का परिणाम है। इसके लिए विशेषज्ञ नीचे दिए गए सवालों पर विचार करने को आवश्यक बताते हैं।
- क्या ग्रामीण महिलाओं की रोजगार में बढ़ोतरी पुरुषों के गैर-कृषि क्षेत्र में जाने के कारण महिलाओं द्वारा उनकी जगह लेने से हुई है?
- क्या यह बढ़ोतरी मजबूरी का संकेत है या फिर महिलाओं के पास अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता बढ़ी है?



