संपादकीय

इसमें US का घाटा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी नागरिकों को ही नौकरी दें। उन्होंने सिलिकॉन वैली में भारतीय मूल के कर्मचारियों के दबदबे पर चिंता जताई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) अभियान प्रवासी विरोधी बनता जा रहा है। US की टेक कंपनियों को उनकी ताजा चेतावनी इसी का प्रमाण है। हालांकि ट्रंप की ऐसी हर कोशिश उनके ही देश को नुकसान पहुंचाएगी।

फिर निशाने पर भारत: अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत ही धमकियों से करने वाले ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी कंपनियां केवल अमेरिकियों को ही नौकरी दें। एक AI समिट में उन्होंने कहा, ‘हमारी कई बड़ी टेक कंपनियों ने अमेरिकी आजादी का फायदा उठाते हुए चीन में फैक्ट्रियां बनाईं, भारत में कर्मचारियों को नौकरी दी और आयरलैंड में मुनाफा बचाया…।’ कुछ अरसा पहले ही ट्रंप ने एपल को चेतावनी दी थी कि अगर उसने भारत में प्रॉडक्शन किया, तो आईफोन पर 25% टैरिफ लगा दिया जाएगा।

काबिलियत को जगह: ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका में बिकने वाला हर सामान अमेरिका में ही बने और उसे बनाएं भी अमेरिकी ही, लेकिन क्या यह संभव है? ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में जब मुक्त व्यापार की बात हो रही है, तब कोई अर्थव्यवस्था खुद में सिमट कर नहीं रह सकती। और सबसे अहम बात, अमेरिकी कंपनियां इसलिए भारत या चीन में प्लांट लगाना चाहती हैं, क्योंकि यहां मैन्युफैक्चरिंग सस्ती है। इसी तरह, सिलिकॉन वैली या दूसरी अमेरिकन इंडस्ट्रीज में भारतीयों ने अपनी काबिलियत के दम पर जगह बनाई है।

इकॉनमी के इंजन: पिछले साल की एक रिसर्च के मुताबिक, सिलिकॉन वैली के करीब एक तिहाई टेक एम्प्लॉई भारतीय मूल के हैं। फॉर्च्युन 500 की लगभग डेढ़ दर्जन कंपनियों में टॉप पोजिशन पर भारतीय बैठे हैं। ये भारतीय अमेरिकी इकॉनमी के इंजन हैं। 2024 में 72 यूनिकॉर्न स्टार्टअप भारतीय मूल के लोगों के थे और इनकी टोटल वैल्यू 195 अरब डॉलर आंकी गई थी। इन कंपनियों में अमेरिकी भी काम करते हैं। इसी तरह, अमेरिका की आबादी में बमुश्किल 1.5% होने के बावजूद भारतीय 5-6% इनकम टैक्स अदा करते हैं।

विकास में योगदान: अमेरिकी की टेक इंडस्ट्री या सिलिकॉन वैली आज अगर वैश्विक स्तर पर राज कर रही है, तो इसमें प्रवासियों का बड़ा योगदान है। दुनियाभर की मेधा, खासकर भारत की, ने मिलकर इस इंडस्ट्री को सींचा है। इलॉन मस्क की टेस्ला को जब ऑटोपायलट सॉफ्टवेयर में सफलता मिली, तो उन्होंने भारतीय मूल के एक रोबोटिक्स इंजीनियर अशोक एल्लुस्वामी का ही नाम पहले लिया था।

कहां से लाएंगे लोग: ट्रंप उस वैश्वीकरण को खत्म करने की बात कर रहे हैं, जिससे सबसे ज्यादा फायदा अमेरिका को ही हुआ है। उनके पास इंडस्ट्री की मांग को पूरा करने लायक वर्कफोर्स नहीं है। भारत के बिना उनका MAGA पूरा नहीं हो सकता।

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