क्वाड का शिखर सम्मेलन का महत्व

क्वॉड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड)बैठक चीन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि क्वाड शिखर सम्मेलन में शीर्ष नेताओं ने रूस-यूके्रन युद्ध, इजरायल बनाम गाजा-हमास टकराव, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के साथ-साथ जलवायु, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी आदि पर भी विमर्श किया गया। क्वाड भारत, जापान, अमरीका और ऑस्टे्रलिया का एक साझा मंच और समूह है। इस बार अमरीका में क्वाड देशों के नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन भारत में किया जाना था, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति बाइडेन के आग्रह पर अमरीका में ही किया गया। यह शिखर सम्मेलन राष्ट्रपति बाइडेन का ‘विदाई सम्मेलन’ है, क्योंकि नवम्बर के बाद अमरीका में नया राष्ट्रपति होगा। साल 2025 में यह शिखर सम्मेलन भारत में होगा। क्वाड का बुनियादी मकसद ‘चीन की दादागीरी’ पर अंकुश लगाना ही नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और खुला माहौल, समुद्री सुरक्षा, शांति और स्थिरता के साथ व्यापारिक आवाजाही को सुनिश्चित करना भी है। भारत को अमरीका, जापान, ऑस्टे्रलिया की नौसेनाओं के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास का भी अवसर मिलता रहेगा, यह सामरिक और क्षेत्रीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। क्वाड को ‘शिखर सम्मेलन’ के स्तर तक पहुंचाने का श्रेय राष्ट्रपति बाइडेन को जाता है। इससे पहले चारों देशों के विदेश मंत्री और राजनयिक आदि ही मिला करते थे, लिहाजा शीर्ष स्तर के फैसले नहीं हो पाते थे। अब भारत, जापान, ऑस्टे्रलिया के प्रधानमंत्री और अमरीका के राष्ट्रपति क्वाड के शिखर सम्मेलन का हिस्सा हैं। चारों देश ही लोकतांत्रिक हैं। मौजूदा बैठक चीन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि क्वाड शिखर सम्मेलन में शीर्ष नेताओं ने रूस-यूके्रन युद्ध, इजरायल बनाम गाजा-हमास टकराव, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के साथ-साथ जलवायु, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी आदि पर भी विमर्श किया गया। क्वाड के साझा घोषणा-पत्र को अमरीका के समयानुसार सार्वजनिक किया जाना है। बहरहाल क्वाड की स्थापना 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने की थी, लेकिन आज चार ताकतवर देश इसके सदस्य हैं। दिसंबर, 2004 में जापान, भारत, ऑस्टे्रलिया, अमरीका ने एक ग्रुप बनाया। इसका पहला शिखर सम्मेलन मार्च, 2021 में ‘ऑनलाइन’ आयोजित किया गया। तब भी कोरोना महामारी का प्रभाव शेष था। दूसरा शिखर सम्मेलन 24 सितंबर, 2021 को वाशिंगटन डीसी में आयोजित किया गया था।
उस दौर में बुनियादी ढांचे, अंतरिक्ष और साइबर सरीखे मुद्दों पर तीन कार्य-समूहों की घोषणा की गई थी। तीसरा सम्मेलन 24 मई, 2022 को टोक्यो, जापान और चौथा शिखर सम्मेलन जापान में ही हिरोशिमा में मई, 2023 को आयोजित किया गया। अब अमरीका में 5वां सम्मेलन हुआ है। दरअसल भारत के संदर्भ में क्वाड एक बहुमूल्य मंच है। इसके जरिए भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री चुनौतियों का जवाब देने में सक्षम हो रहा है। भारत चीन का मुकाबला करने के लिए अन्य देशों की सहायता ले सकता है। अमरीका इस क्षेत्र में अपने समुद्री बेड़े भेजकर चीन को सावधान करता रहा है। दरअसल चीन इस क्षेत्र में अपना एकाधिकार मानता रहा है, जिसे भारत की समुद्री ताकत ने बराबर का जवाब दिया है। भारत को व्यापारिक लाभ भी हुआ है, क्योंकि यह सम्मेलन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक प्रगति के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग और शांतिपूर्ण तरीके से काम करने की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है। शिखर सम्मेलन में भाग लेने और अन्य कार्यक्रमों के लिए प्रधानमंत्री मोदी अमरीकी प्रवास पर हैं। उन्होंने राष्ट्रपति बाइडेन के अलावा जापान और ऑस्टे्रलिया के प्रधानमंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित करेंगे। जैसा कि हर प्रवास के दौरान होता है, इस बार भी प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित कर खुलासा करेंगे कि आज का भारत क्या है? भारत क्वाड का विस्तार भी चाहता है, लेकिन इस बार एजेंडा इतना व्यापक था कि इस मुद्दे पर संवाद नहीं हो सका। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने खुलासा किया है कि सभी ज्ञात मुद्दों के अलावा, उभरती प्रौद्योगिकियों, बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आतंकवाद रोधी क्षेत्रों पर भी विमर्श किया गया है। चीन की कुंठा यह है कि उसके विदेश मंत्री ने 2018 में क्वाड को सुर्खियां बटोरने वाला विचार और समूह करार दिया था। चीन का यह भी आरोप रहा है कि क्वाड एशिया की क्षेत्रीय शक्तियों के बीच कलह भडक़ाने का काम कर रहा है। वह चीन के ‘सुपरपॉवर’ बनने के रास्ते का रोड़ा भी है। दरअसल चीन को अपनी कुंठाओं पर पुनर्विचार करना चाहिए।



