राजनीति

नीतीश को मिले भारत रत्न, तो क्या राजनीति से संन्यास ले लेंगे

अगले साल अक्तूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 25 दिसंबर को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ओडिशा के पूर्व सी.एम. नवीन पटनायक को भारत रत्न दिया जाना चाहिए।
इससे पहले अक्तूबर 2024 में, जे.डी.(यू) ने पटना में कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाया था, जिसमें सी.एम. नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न पुरस्कार की मांग की गई थी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सैक्युलर) जीतन राम मांझी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान सहित सत्तारूढ़ गठबंधन पार्टी के नेताओं ने इस मांग का समर्थन किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन अटकलों को खारिज किया है कि भाजपा बिहार में महाराष्ट्र जैसी रणनीति अपना सकती है। जबकि राज्य भाजपा नेतृत्व ने कहा है कि एन.डी.ए. आगामी राज्य विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगा। 

25 दिसंबर को, वरिष्ठ जे.डी.(यू) नेताओं ने नई दिल्ली में इसी बात पर जोर दिया। हालांकि, इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की चुप्पी ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी है कि विधानसभा चुनाव से पहले वह एक और राजनीतिक बदलाव कर सकते हैं। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि अगर नीतीश कुमार को भारत रत्न मिल भी जाता है तो क्या वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे और अपनी पार्टी और सरकार भाजपा को सौंप देंगे? परन्तु यह संभावना कम ही लगती है। हालांकि, भाजपा नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने के बाद उन्हें सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना आसान हो सकता है, इससे उनके समर्थकों में सद्भावना बढ़ेगी और इसके अलावा इससे भाजपा के हाथों में राजनीतिक सत्ता भी जाएगी।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का पटना राजभवन में स्थानांतरण : बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का पटना राजभवन में स्थानांतरण काफी स्पष्ट है और यह किसी की नजर में नहीं आने वाला है। जे.डी.(यू) ने खान की उदार और प्रगतिशील अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में साख का हवाला देते हुए इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं, आर.जे.डी. ने भी खान की नियुक्ति का स्वागत किया है, लेकिन केरल में उनके राज्यपाल के रूप में कार्यकाल का हवाला देते हुए संघीय ढांचे की कथित अवहेलना के उनके पिछले रिकॉर्ड पर संदेह और आशंका जताई है। हालांकि, खान केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार के साथ कई मुद्दों पर उलझे हुए हैं, जबकि भाजपा-एन.डी.ए. नेतृत्व का मानना है कि बिहार के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति से राज्य में एन.डी.ए. को ही मदद मिलेगी। 

इस बीच नीतीश कुमार सरकार के लिए असली चुनौती यह है कि अगर वह मुस्लिम समुदाय तक नहीं पहुंचती है, तो वह न केवल एक महत्वपूर्ण मतदाता आधार खो देगी, बल्कि 18 प्रतिशत मुस्लिम वोट भी राजद और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन (विपक्षी गठबंधन) को चला जाएगा। 

‘आप’ ने दिया विपक्षी एकता को बड़ा झटका : दिल्ली चुनाव से पहले विपक्षी एकता को बड़ा झटका देते हुए आम आदमी पार्टी (‘आप’) ने कहा कि अगर वह अरविंद केजरीवाल को देशद्रोही कहने वाले वरिष्ठ नेता अजय माकन के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है और यह स्पष्ट नहीं करती है कि वह दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा के साथ मिलीभगत कर रही है या नहीं, तो वे अन्य दलों से कांग्रेस को ‘इंडिया’ ब्लॉक  से हटाने के लिए कहेंगे। ‘आप’ ने यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे संदीप दीक्षित और मनीष सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे फरहाद सूरी सहित कांग्रेस के उम्मीदवारों को भाजपा द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। ‘आप’ का यह कदम ऐसे समय में आया है जब हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 

टी.एम.सी. प्रमुख ममता बनर्जी ने ‘इंडिया’ गठबंधन की कमान संभालने के लिए शरद पवार और लालू प्रसाद जैसे क्षत्रपों का समर्थन हासिल किया है। दूसरी ओर, सपा ने भी यू.पी. उप-चुनावों में अपनी ताकत दिखाई है और अब उसने दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल को समर्थन देने का फैसला किया है।

कांग्रेस का संविधान बचाओ राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान : कांग्रेस कार्य समिति (सी.डब्ल्यू.सी.) ने भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार को घेरने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव आंबेडकर और संविधान के इर्द-गिर्द केंद्रित 13 महीने लंबे अभियान की घोषणा की। पार्टी ने कहा कि उसने 26 जनवरी, 2025 और 26 जनवरी, 2026 के बीच संविधान बचाओ राष्ट्रीय पदयात्रा नामक एक राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान की भी योजना बनाई है। 
कांग्रेस ने यह घोषणा ऐसे समय की है जब वह एक राजनीतिक विवाद में लगी हुई है, जिसमें भाजपा पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में भाषण का हवाला देते हुए बी.आर. आंबेडकर का अनादर करने और संविधान को कमजोर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, भाजपा ने आरोपों का खंडन किया। पार्टी ने जवाबदेही और क्षमता के आधार पर एक बड़े संगठनात्मक बदलाव का भी आह्वान किया, जो तुरंत शुरू होकर अगले साल तक चलेगा। प्रस्ताव में कहा गया है कि अगला ए.आई.सी.सी.सत्र अप्रैल 2025 में गुजरात के पोरबंदर में आयोजित किया जाएगा।-राहिल नोरा चोपड़ा

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