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काश! भगवान मेरे बिछड़े यारों को वापस ले आए… जब धर्मेंद्र करीबियों की मौत से गए थे टूट, अब मनोज कुमार भी गए

भारत कुमार के नाम से मशहूर एक्टर और डायरेक्टर मनोज कुमार का 87 साल की उम्र में 4 अप्रैल को निधन हो गया। जहां पूरा देश और फैंस शोक में हैं, वहीं धर्मेंद्र को भी तगड़ा झटका लगा। मनोज उनके जिगरी यार थे और स्ट्रगल के दिनों से साथ थे। ऐसे में जब सच्चा दोस्त उन्हें यूं छोड़कर दुनिया से रुखसत हुआ, तो वह खुद को रोक नहीं सके। आंखो में आंसू समेटे और चेहरे पर उदासी लिए धर्मेंद्र अपने दोस्त को आखिरी विदाई देने पहुंचे। धर्मंद्र का हाल ही आंखों का ऑपरेशन हुआ था, फिर भी लड़खड़ाते कदमों से वह दोस्त को आखिरी बार मिलने पहुंचे।

बीते कुछ समय में धर्मेंद्र ने अपने कई जिगरी यार खो दिए, जिनमें प्राण और दिलीप कुमार के अलावा उनके बचपन के दोस्त इब्राहिम का भी नाम शामिल है। धर्मेंद्र के मन में हर पल इस बिछोह की टीस है, जो कुछ साल पहले एक दुख भरे गुबार के रूप में बाहर निकली थी।

बिछड़े यारों का धर्मेंद्र को गम, की थी बात

धर्मेंद्र ने साल 2013 में ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में उस दौर के बारे में बात की थी, जब वह करियर के पीक पर थे। उस वक्त उन्होंने बताया था कि फिल्मी दुनिया में कैसा माहौल था। उसी इंटरव्यू में धर्मेंद्र को अपने वो जिगरी दोस्त याद आ गए थे, जो समय के थपेड़ों में उनसे बिछड़ते चले गए।

‘काश! भगवान घड़ी की सुई घुमाए, मेरे बिछड़े यार ले आए’

धर्मेंद्र ने कहा था, ‘काश! भगवान समय को पीछे मोड़ पाते, और सभी एक्टर्स और मेरे दोस्त जो चले गए हैं, फिर से वापस आ पाते, और सब कुछ वैसा ही होता जैसा हमारे समय में था। दोस्ती से बढ़कर, सभी के साथ गहरा लगाव था।’

‘गुजरते समय के साथ सब दफन हो जाता है’

धर्मेंद्र ने आगे कहा था, ‘मैं दिलीप साहब, शशि कपूर, मनोज कुमार जैसे लोगों से बहुत जुड़ा हुआ था। मुझे नहीं लगता कि ऐसा फिर कभी होगा। काम से परे, चाहे हमने कोई भी फिल्म की हो, हम एक परिवार की तरह थे। प्राण जैसे लोगों के साथ, मैंने बहुत सारी फिल्में कीं और हम एक-दूसरे के बहुत करीब थे। लेकिन समय ऐसी चीज है जो गुजरते हुए सब कुछ दफन कर देता है। जीवन में कुछ भी स्थिर नहीं है। सब कुछ जाना ही है।’

धर्मेंद्र के ‘मन्नू’ मनोज कुमार भी चले गए, कभी दोनों थे रूममेट, बरसों का याराना

अब धर्मेंद्र के जिगरी यार मनोज कुमार भी चल बसे। धर्मेंद्र, मनोज कुमार को प्यार से ‘मन्नू’ कहकर बुलाते थे। वह मुंबई में धर्मेंद्र के पहले दोस्त रहे। दोनों स्ट्रगल के दिनों में साथ थे और रूममेट थे। धर्मेंद्र ने ‘द हिंदू’ को इंटरव्यू में बताया था कि जब रोल की तलाश करते हुए उन्हें खूब बेइज्जती का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने तंग आकर वापस गांव लौट जाने का फैसला कर लिया था। लेकिन मनोज कुमार ने उन्हें रोका।

मनोज कुमार राइटिंग से पैसे कमाकर करते थे अपना और धर्मेंद्र का गुजारा

मनोज कुमार ने धर्मेंद्र को धैर्य रखने और हिम्मत न हारने की सलाह दी। वह घोस्टराइटिंग भी करते थे, और जो कमाई होती, उससे अपना और धर्मेंद्र का पेट भरते थे। आज जब वह यार बिछड़ा, तो धर्मेंद्र एकदम लड़खड़ा गए। आंखों में आंसुओं के साथ उदासी और दोस्त को तलाशती उम्मीद नजर आ रही थी।

बेटे ने बताया मनोज कुमार थे लंबे समय से बीमार

मनोज कुमार ने शुक्रवार, 4 अप्रैल की सुबह मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में दम तोड़ा। उनके बेटे कुणाल गोस्वामी ने ANI को बताया कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। उन्हें आखिरी समय में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।

मनोज कुमार के फेफड़ों में भर जाता था पानी

वहीं, मनोज कुमार के साथ काम कर चुकीं अरुणा ईरानी ने बताया कि वह लंबे समय से बीमार थे। उनके फेफड़ों में पानी भर जाता था, जिसके इलाज के लिए वह अस्पताल जाते थे। बताया जा रहा है कि मनोज कुमार लिवर सोरायसिस से पीड़ित थे।

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