पूंजी के खेल का शिकार बनता मनुष्य, हमेशा जीवित रहने की चाह

विज्ञान की दुनिया बेशुमार चमत्कारों से भरी है, लेकिन ये चमत्कार किसी परी या बौने की जादुई छड़ी से न होकर विज्ञान आधारित नियमों के अनुसार ही होते हैं। हाल में अमेरिका में एक ऐसे बच्चे ने जन्म लिया, जिसे तीस साल पहले सुरक्षित भ्रूण से दुनिया में लाया गया है। इसे दुनिया का सबसे बूढ़ा बच्चा बताया जा रहा है। इसी तरह दुनिया से गायब वुली वोल्फ की वापसी हो चुकी है। डोडो और डायनासोर के बारे में भी कहा जा रहा है कि एक बार वे फिर धरती पर विचरेंगे।
विशालकाय हाथी मैमथ को भी वापस लाने की कोशिश की जा रही है। बहुत सी लुप्त प्रजातियों की वापसी चकित करती है। क्लोनिंग के जरिए जन्मी डाली भेड़ के बारे में तो आपने सुना ही होगा। एक व्यक्ति ने लाखों डालर खर्च करके अपने मृत डागी का क्लोन बनवाया भी था। विज्ञान के जरिए ही मनुष्य चांद तक पहुंचा। अब मंगल ग्रह पर जाने की सोच रहा है। विज्ञान ऐसी तमाम बातों को भी खोजने की कोशिश कर चुका है, जिनमें सफलता नहीं मिली। जैसे कि रसायनशास्त्र के विकास के बारे में कहा जाता है कि उसका विकास अमृत और सोने की खोज के बारे में हुआ। अमृत भारतीय मनीषा में भी बहुत जगह बनाता है। कहते हैं समुद्र मंथन के दौरान यह निकला भी था और देवताओं और दानवों में इसके अधिकार के लिए युद्ध हुआ था।
मनुष्य मृत्यु से बहुत डरता है। वह हमेशा जीवित रहना चाहता है। चिकित्सा विज्ञान ने उसे अब लंबी आयु भी प्रदान की है, लेकिन मृत्यु पर विजय अभी तक नहीं पाई जा सकी है। स्पेन के एक गांव में लोगों से कहा जाता है कि उन्हें मरना नहीं है। इसलिए वे ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ रहें। एक ऐसी कथा भी है कि एक राजा ने अमरता का वरदान प्राप्त कर लिया था। फिर वह ऐसे स्थान पर पहुंचा,जहां लोग अमर थे। वे जीवन से ऊब चुके थे। मरना चाहते थे, लेकिन मर नहीं सकते थे। यह दुनिया विविध विचारों से भरी हुई है।
अभी पिछले दिनों खबर आई कि जर्मनी की एक बायो लैब शवों को सुरक्षित करना चाहती है, ताकि भविष्य में यदि विज्ञान का इतना विकास हो जाए कि मृत व्यक्ति को जीवित किया जा सके, तो इन्हें फिर से जीवित किया जा सकेगा। यह लैब इसके लिए दो लाख डालर लेगी। अब तक छह सौ से अधिक लोगों ने उसके यहां बुकिंग कराई है। इसे क्रायो प्रिजर्वेशन का नाम दिया गया है। इस प्रक्रिया के बारे में लैब ने बताया है कि मृत्यु के बाद शरीर को बेहद ठंडे तापमान पर सुरक्षित किया जाएगा, ताकि शरीर के ऊतकों को कोई नुकसान न पहुंचे और वापस वे जीवित किए जा सकें।
बायो लैब का कहना है कि उसे व्यक्ति के इस दुनिया से जाने के बाद फौरन सूचना मिलनी चाहिए, क्योंकि इस प्रक्रिया में देरी ठीक नहीं होगी। यह दुनिया की पहली ऐसी लैब बताई जा रही है। जल्दी ही यह लैब अमेरिका में भी अपना काम शुरू करने वाली है। यह भी कहा जा रहा है कि मृत दिमाग को दोबारा से काम के योग्य बनाना असंभव है, क्योंकि दिमाग की संरचना बहुत जटिल होती है। इसे अब तक समझा नहीं जा सका है। मान लीजिए ये लोग पांच सौ साल बाद जीवित हो भी गए, तो क्या उस बदली हुई दुनिया से दोबारा तालमेल बिठा पाएंगे? बहुत साल पहले मन्मथनाथ गुप्त का एक उपन्यास पढ़ा था, जिसमें एक व्यक्ति मृत्यु के बहुत साल बाद जीवित हो जाता है। वह बदली हुई दुनिया को चकित नजर से देखता है।
भारत में तमाम लोग पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं। वे सोचते हैं कि मनुष्य की मृत्यु का मतलब है, पुराने कपड़ों को बदलना, क्योंकि फिर से मनुष्य जन्म लेगा। यहां तो लोग जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त होने के लिए मोक्ष की कल्पना भी करते हैं, लेकिन अन्य बहुत से पंथों में लोग मानते हैं कि जीवन सिर्फ एक बार ही मिलता है। इसलिए वे लंबी उम्र तक जीना चाहते हैं। इसके लिए तरह-तरह के प्रयास करते हैं। जीवन खत्म हो जाए, तो दोबारा कैसे जीवित हों, इसकी कल्पना इसी सोच का परिणाम है। यह एक तरह से अमरता की चाहत ही है। इसीलिए कंपनियां पैसा कमाने के लिए इस सोच का फायदा उठाती हैं। कमाल यह है कि यूरोप के बहुत से देशों में इच्छा मृत्यु वैध है।
वहां ऐसे अस्पताल हैं, जहां आप चाहें तो इच्छा मृत्यु प्राप्त कर सकते हैं। आस्ट्रेलिया के एक विज्ञानी ने सौ वर्ष की उम्र में स्विट्जरलैंड में जाकर इच्छा मृत्यु प्राप्त की थी। दूसरी तरफ ऐसी कंपनियां हैं, जो शवों को सुरक्षित करना चाहती हैं। जाहिर है कि ये सब पैसा कमाने का धंधा है। पूंजी के इस खेल में अंततः शिकार मनुष्य ही बनता है।
विज्ञानियों ने अपने अथक परिश्रम से हमें चांद पर पहुंचाया है, लेकिन बीच में कुछ कंपनियां मैदान में आ गई हैं। चांद पर जमीनें बेची जाने लगी हैं। बताया जाता है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने भी चांद पर जमीन खरीदी थी और अक्सर वे उसे दूरबीन के जरिए देखते थे। दुनिया में ऐसे कई लोग होंगे, जिन्होंने चांद पर जमीन खरीदी होगी। आखिर चांद ने अपनी जमीन का मालिकाना हक किसे दिया, कब दिया, लेकिन जिसे कहते हैं न कि बस एक आइडिया को बेचना है, तो उसे सफलतापूर्वक बेच दिया गया। व्यापारियों की तिजोरियां भर गईं। अब भी भर रही होंगी। मृत्यु के बाद जीवन को बेचना भी एक ऐसा ही आइडिया है।



