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कैसे अचानक धरती पर आती है बाढ़? जानिए आखिर क्यों फटता है बादल

बादल फटने की प्रक्रिया प्राकृतिक है। पहाली क्षेत्रों में अक्सर बादल फटने की घटना होती है। अक्सर बादल फटने की घटनाएं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में होती है।बादल फटने की प्रक्रिया प्राकृतिक है। पहाली क्षेत्रों में अक्सर बादल फटने की घटना होती है। अक्सर बादल फटने की घटनाएं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में होती है।

बारिश का मौसम देश के किसानों के लिए खुशी लेकर आते हैं। भारत में 50 फीसदी से ज्यादा कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है। बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। तो वहीं दूसरी तरफ इस मौसम बाढ़, लैंडस्लाइड और बादल फटने या आकाशीय बिजली गिरने जैसी घटनाएं होती हैं। कहीं पर बाढ़, तो कहीं अचानक बादल फटने से भारी तबाही मचती है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर बादल क्यों और कैसे फटते हैं। 

बादल फटने की प्रक्रिया प्राकृतिक है। पहाली क्षेत्रों में अक्सर बादल फटने की घटना होती है। अक्सर बादल फटने की घटनाएं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल मॉनसून में ऐसी आपदाएं आती हैं। लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर बादल कैसे फटता है और इसके पीछे की वजह क्या है? आइए आपको विस्तार से बताते हैं…

अगर किसी स्थान पर 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होती है, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। बादलों को नमी न पहुंचने के कारण यह घटना होती है। बादलों को नमी नहीं पहुंचती है या पहुंचनी बंद हो जाती है, तो ठंडी हवा इसमें प्रवेश कर जाती है, जिसके सफेद बादल काले बादलों में बदल जाते हैं और तेजी से बारिश होती है। 

बादल उस स्थित में फटता है, जब वातावरण में नमी और गर्मी का स्तर दोनों काफी बढ़ जाता है। अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में यह स्थिति बन जाती है। बादल फटने की पूरी प्रक्रिया विज्ञान से जुड़ी है। जब गर्म हवाएं बादल को ऊपर ले जाती हैं, तो बादल ठंडी हवा के संपर्क में आकर ठंडा हो जाता है। यह बादल नमी से भरा रहता है और ठंडी हवा के संपर्क में आने से बादल में जमी नमी या वाटर वेपर तेजी से पानी की बूंद में बदल जाते हैं और भारी बारिश होती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान के कारण तेजी से हवा ऊपर जाती है और बादल बन जाता है। इसके बाद ठंडी हवा के संपर्क में आते ही बारिश होने लगती है। बारिश के मौसम में जिस स्थान पर कम का हवा का दबाव होता है, उस क्षेत्र में गर्म और नमी वाली हवा तेजी से ऊपर जाती है। इससे बादल फटने की संभावना अधिक होती है। इसके साथ ही अगर ठंडी और गर्म हवाएं आपस में टकराती हैं तो भी बादल फट जाता है। बादल फटने से होने वाली बारिश 100 किलोमीटर/घंटा होती है। 

बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आती है, जिसे कुमुलोनिम्बस बादल (Cumulonimbus Clouds) कहा जाता है, क्योंकि इसके कारण भारी बारिश होती है। बादल फटने की प्रक्रिया में पानी की छोटी छोटी बूंदें आपस में टकराती हैं और एक विकराल रूप धारण कर लेती हैं। इस प्रक्रिया को लैंगमुइर प्रेसिपिटेशन कहते हैं, जिसमें  बारिश की बड़ी बूंदें छोटी बूंदों के साथ मिलकर तेजी से नीचे आती हैं। 

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