स्वास्थ्य

आपके हार्ट की वास्तविक उम्र कितनी है, बतायेगी नयी तकनीक

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो हमारे दिल की फंक्शनल एज बता सकती है. इससे समय से पहले ही हृदय रोगों की पहचान हो सकेगी.

Health: शोधार्थियों ने हमारे हार्ट की फंक्शनल एज का पता लगाने के लिए एक नया तरीका ढूंढ निकाला है. इस नये तरीके से अब हम यह जान सकते हैं कि हमारे हार्ट की फिजिकल, साइकोलॉजिकल और सोशल एज कितनी है, यानी यह उसकी वास्तविक उम्र (क्रोनोलॉजिकल एज) से कितनी अलग है. इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एमआरआइ स्कैन का उपयोग किया है. इस नये अध्ययन से न केवल यह पता चलता है कि एमआरआइ स्कैन किस तरह से हमारे हार्ट की फंक्शनल एज का पता लगा सकता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि हमारी अस्वस्थ जीवनशैली किस तरह हमारे हृदय को बीमार कर रही है. माना जा रहा है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष हार्ट डिजीज के डायग्नोसिस के तरीके को बदल सकते हैं. अब जबकि एमआरआइ के जरिये हार्ट डिजीज का पता चल सकेगा, तब जाहिर सी बात है कि यह उन तमाम लोगों के जीवन के लिए वरदान साबित होगा, जिन्हें समय से यह पता ही नहीं चल पाता कि उनका दिल रोगी हो रहा है. आज जब दुनियाभर में असमय होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण हृदय रोग है, यह अत्याधुनिक तकनीक, घातक होने से पहले रोगों की पहचान कर लेगी. इस लिहाज से यह मौत के आंकड़ों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी. शोधार्थियों की टीम इस तकनीक को गेम चेंजर मान रही है.

बीमार लोगों के हृदय की उम्र अधिक

इस नये शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 557 लोगों के एमआरआइ का अध्ययन किया, जिनमें 197 लोग स्वस्थ और 366 ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या ओबेसिटी से ग्रस्त थे. इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि स्वस्थ लोगों का हार्ट उनके क्रोनोलॉजिकल एज (वास्तविक उम्र) के बराबर ही था. परंतु जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन, ओबेसिटी और आर्टियल फिब्रिलेशन से पीड़ित थे, उनके हार्ट की फंक्शनल एज उनके क्रोनोलॉजिकल एज से अधिक थी. इन वैज्ञानिकों का मानना है कि डायबिटीज या ओबेसिटी से पीड़ित लोगों का हृदय अक्सर अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से बूढ़ा होता है. ऐसे में यह तकनीक डॉक्टरों को समय रहते हृदय रोग को रोकने के उपाय करने में मदद करेगी.

ऐसे विकसित हुई तकनीक

इस तकनीक को इस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय (यूइए) की अगुवाई वाली टीम ने नॉरफॉक व नॉरविच यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स फाउंडेशन ट्रस्ट, नेशनल हार्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट सिंगापुर, यूनिवर्सिटी ऑफ शेफिल्ड, हॉस्पिटल सैन जुआन डे डियोस, स्पेन, बार्थ हेल्थ एनएचएस ट्रस्ट, लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, नीदरलैंड, यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स और नेशनल यूनिवर्सिटी सिंगापुर के सहयोग से विकसित किया गया है.

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