मध्यप्रदेश

नरसिंहपुर कांड पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, मुख्य सचिव को दिया अल्टीमेटम

जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भाई-बहनों के बीच ईर्ष्या से पनपने वाली मानसिक विकृतियों और अपराधों पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति करने और जिला अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं वाले मेंटल हेल्थ क्लीनिक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव को 90 दिनों में इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

बड़ी ने छोटी बहन की कर दी हत्या

यह आदेश नरसिंहपुर जिले के एक मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक बहन ने अपनी छोटी बहन की हत्या कर दी थी। आरोपी बहन ने स्वीकार किया था कि वह अपनी छोटी बहन को अधिक महत्व दिए जाने के कारण हीन भावना से ग्रस्त थी और इसी ईर्ष्या के चलते उसने यह जघन्य अपराध किया। इस मामले में जिला न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की थी।

खारिज कर दी जमानत याचिका

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि भाई-बहनों की ईर्ष्या मानसिक विकृति को जन्म देती है, जो उन्हें अपराध की ओर धकेल सकती है। इस समस्या को समाज में गंभीर रूप लेने से पहले रोकना बहुत जरूरी है। इसलिए, कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति सुनिश्चित करें।

मेंटल हेल्थ क्लिनिक बनाने के निर्देश

इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि कम से कम जिला स्तरीय अस्पतालों में काबिल लोगों और आवश्यक सुविधाओं से लैस मेंटल हेल्थ क्लीनिक स्थापित किए जाएं। कोर्ट ने आदेश की एक प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि वे नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य, खासकर युवाओं और बुजुर्गों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक नीति बना सकें। संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे इस पर तुरंत कार्रवाई करें।

5 प्वॉइंट में जानें पूरी खबर

  1. नरसिंहपुर की खुशबू ने अपनी छोटी बहन शिखा को माता-पिता से ज्यादा तवज्जो मिलने की जलन में मार डाला।
  2. हाई कोर्ट ने इस ‘सिबलिंग राइवलरी’ (भाई-बहनों की होड़) को एक गंभीर मानसिक बीमारी माना है।
  3. कोर्ट ने चिंता जताई कि अगर वक्त रहते काउंसलर नियुक्त नहीं किए गए, तो ईर्ष्या का यह वायरस समाज को निगल जाएगा।
  4. मुख्य सचिव को 90 दिनों के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ पेश करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
  5. अब हर जिले में बुनियादी ढांचे से लैस ‘मेंटल हेल्थ क्लीनिक’ बनाना अनिवार्य होगा।
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