पति को कमाई बताने के लिए कर सकते हैं बाध्य, हाई कोर्ट लखनऊ पीठ का बड़ा फैसला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की हाई कोर्ट लखनऊ पीठ ने पति की आय को लेकर बड़ा फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में पति को अपनी आय और संपत्ति का ब्योरा देना पड़ेगा। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट इस संबंध में विवरण की मांग कर सकती है। घरेलू हिंसा के मामलों में पति की ओर से आय और संपत्ति का विवरण छुपाए जाने या कम बताए जाने जैसे मामलों में यह फैसला बड़ा माना जा रहा है। जिस मामले में कोर्ट का फैसला आया है, उसमें आर्किटेक्ट पति ने खुद को निचली अदालत में श्रमिक बताया था।
क्या है पूरा मामला?
हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने घरेलू हिंसा के एक मामले में स्पष्ट कर दिया है कि पति को आय, सम्पत्ति का ब्योरा देने के लिए ट्रायल कोर्ट बाध्य कर सकती है। दरअसल, निचली अदालत ने पति को आय और संपत्ति का ब्योरा पेश करने का आदेश देने का पत्नी का प्रार्थना पत्र रद्द कर दिया था। पत्नी की ओर से इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने एसीजेएम कोर्ट लखनऊ का आदेश रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद के मामलों में इसे अहम बताया।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में वास्तविक आय का खुलासा बहुत जरूरी है। यह आदेश जस्टिस बृजराज सिंह की एकल पीठ ने दिया। कोर्ट ने पत्नी, नाबालिग पुत्र की ओर से दाखिल याचिका पर आदेश पारित किया है। पत्नी ने पति, ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट के आरोप लगा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, लखनऊके समक्ष केस दर्ज किया है।
पति ने बताया था श्रमिक
रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला का पति आर्किटेक्ट है। उसकी वार्षिक आय 4.85 लाख से 5.07 लाख रुपये के बीच है। पति ने निचली अदालत के समक्ष खुद को श्रमिक बताया। इसके बाद निचली अदालत ने पत्नी की याचिका को रद्द कर दिया था। इस मामले में हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के मामले में आए फैसले का हवाला दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि रजनीश बनाम नेहा मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले अनुसार, पति की आय संपत्ति के सही खुलासे के लिए उससे आवश्यक दस्तावेज मंगवाए जा सकते हैं। ट्रायल कोर्ट की ओर से पति को उसकी आय से संबंधित दस्तावेज मंगाने का अधिकार है।



