स्वास्थ्य

सिर्फ 20 मिनट में माइग्रेन का इलाज, गुजरात की यूनिवर्सिटी ने बना डाला चमत्कारी डिवाइस

अहमदाबाद: दर्द निवारक दवाइयों का सेवन सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं के लिए आम है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक इन दवाइयों का इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है? अब अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और छात्रों ने एक खास ”Cerebre: The Migraine Curing Device” तैयार किया है, जो सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं को महज कुछ मिनटों में बिना किसी दर्दनिवारक दवा के हल कर सकता है.

शरीर पर दवाइयों के साइड इफेक्ट्स
लोकल 18 से बात करते हुए निरमा यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंवदा पारिख ने बताया कि आजकल के युवा अपनी व्यस्त जीवनशैली और अनियमित दिनचर्या के कारण मानसिक तनाव, माइग्रेन या अन्य सिर से जुड़ी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं. इसके लिए वे आमतौर पर दर्दनिवारक दवाइयों का सेवन करते हैं, लेकिन लंबे समय तक इन दवाइयों के साइड इफेक्ट्स शरीर के अन्य अंगों, जैसे कि किडनी और लीवर पर प्रभाव डाल सकते हैं.

बता दें कि इस समस्या का समाधान निकालने के लिए निरमा यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन डिपार्टमेंट के प्रोफेसरों और छात्रों ने एक खास डिवाइस तैयार किया है, जिसे ”Cerebre” कहा जाता है. यह डिवाइस सिर की किसी भी समस्या को महज कुछ मिनटों में हल कर देती है. इस डिवाइस का काम मालिश जैसा नहीं है, बल्कि यह एक विशेष फ्रिक्वेंसी पर काम करती है. यह एक सामान्य बेल्ट जैसी दिखाई देती है, लेकिन यह एक नॉन-इनवेसिव, ड्रग-फ्री डिवाइस है, जिसे विशेष रूप से माइग्रेन राहत देने के लिए टार्गेटेड वाइब्रेशन थेरापी के जरिए डिजाइन किया गया है.

डिवाइस को एक कंट्रोलर से भी जोड़ा गया
यह डिवाइस सिर के विभिन्न माइग्रेन स्पॉट्स पर काम करने के लिए 6 LPA मोटर्स से लैस है, जो 50 Hz से लेकर 150 Hz तक की सॉफ्ट ट्यून वाइब्रेशन्स पैदा करती हैं. इसके साथ ही डिवाइस को एक कंट्रोलर से भी जोड़ा गया है, जिसके जरिए डिवाइस में लगे मोटर्स को विभिन्न फ्रिक्वेंसीज पर नियंत्रित किया जा सकता है. इस तरह व्यक्ति उस हिस्से पर इस डिवाइस को लगा सकता है जहां दर्द हो और कंट्रोलर के जरिए मोटर को सक्रिय किया जा सकता है.

इस डिवाइस का मुख्य लाभ यह है कि व्यक्ति सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं से आसानी से छुटकारा पा सकता है. इसके अलावा, यह डिवाइस उन बच्चों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा जिनकी याददाश्त कमजोर है या जिनका मन एक जगह स्थिर नहीं रहता. आमतौर पर अगर माइग्रेन दर्द केंद्र में होता है, तो यह लंबवत स्थिति (Vertical position) में होता है, जबकि अगर यह साइड में है, तो यह तिरछी दिशा (oblique direction) में ऊपरी होता है. जबकि इस डिवाइस में लगे मोटर माइग्रेन के विपरीत दिशा में फ्रिक्वेंसी बल देते हैं, जिससे माइग्रेन का दर्द कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है.

इस तरह, व्यक्ति बिना किसी दर्दनिवारक दवा के सिर्फ 20-35 मिनट में माइग्रेन से राहत पा सकता है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य आज के युवा को दर्दनिवारक दवाइयों से दूर रखकर उनके कीमती अंगों, जैसे किडनी और लीवर को स्वस्थ रखना है. इस डिवाइस का करीब 150 यूजर्स पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है. इसे बनाने में उन्हें लगभग दो महीने का समय लगा. यह प्रोजेक्ट ”इंटरनेट ऑफ थिंग्स” कोर्स के तहत शुरू किया गया था और इसे डॉ. प्रियंवदा पारिख और प्रोफेसर किशनकुमार पटेल द्वारा गाइड किया गया.

वर्तमान में इस डिवाइस के लिए एक प्रोविजनल पेटेंट फाइल किया गया है. इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट को ”Association Design of India” द्वारा तीन विभिन्न श्रेणियों में अवॉर्ड मिला है: बेस्ट डिजाइन, बेस्ट प्रोटोटाइप और बेस्ट फंक्शनलिटी. इस प्रोजेक्ट को ”Young Designers League” में भी प्रथम रनर-अप का पुरस्कार मिला है, जो कि अवंतिका यूनिवर्सिटी, उज्जैन और MITID, इंदौर द्वारा आयोजित किया गया था.

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