व्यापार

सोने के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, ख़रीदना फ़ायदेमंद या बेचना

भारत में सोना सिर्फ़ निवेश के लिए ही नहीं ख़रीदा जाता है बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक कारण भी हैं.

हाल के सालों में सोने में निवेश करने का चलन बढ़ा है. स्टॉक बाज़ार में हलचल और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता की चिंताओं की वजह से कई बार निवेशक सोने में निवेश को सुरक्षित मानते हैं.

लेकिन, हाल के समय में, सोने के दाम भी लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. ऐसा कम ही होता है जब सोने के दाम में मामूली गिरावट दिखाई देती है.

चेन्नई में 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की क़ीमत 70 हज़ार के ऊपर चली गई है, जबकि 22 कैरेट की क़ीमत 65,000 पार कर गई है.

सोने के दामों में आ रही तेज़ी की वजह बताते हुए मद्रास गोल्ड एंड डायमंड मर्चेंट्स एसोसिएशन के महासचिव शांता कुमार कहते हैं कि दामों में बदलाव की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में हो रहे बदलाव हैं.

वहीं, इस समय भारत का रुपया डॉलर के मुक़ाबले 83.40 पर कारोबार कर रहा है. यानी एक डॉलर की क़ीमत इस समय 83 रुपये से अधिक है.

डॉलर के मुक़ाबले रुपये की क़ीमत में आ रही गिरावट भी सोने का दाम बढ़ने की वजह है.

शांता कुमार के मुताबिक़, इसके अलावा और भी कई कारण हैं जिनकी वजह से सोने के दाम प्रभावित हो रहे हैं.

कुमार कहते हैं कि आयात शुल्क और वैश्विक स्तर पर युद्ध की स्थितियों ने भी सोने के दामों को प्रभावित किया है.

भारत सालाना लगभग 800 टन सोने का निर्यात करता है. भारत स्विटज़रलैंड, दक्षिण अफ़्रीका और दुबई जैसी जगहों से सोने का सर्वाधिक आयात करता है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संकट को भी शांता कुमार भारत के बाज़ार में सोने की क़ीमत बढ़ने की वजह मानते हैं.

शांता कुमार कहते हैं, “अमेरिका में बेरोज़गारी सूचकांक बहुत नीचे चला गया है. रियल एस्टेट सेक्टर में भी गिरावट आ रही है. शेयर बाज़ार में भी बढ़त की कोई ट्रेजेक्टरी दिखाई नहीं दे रही है. महंगाई बढ़ रही है. इन सबका असर अर्थव्यवस्था पर हो रहा है और इससे भी सोने के दाम प्रभावित हो रहे हैं.”

भारत में लोकसभा चुनाव आ रहे हैं. ऐसे में ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या लोकसभा चुनावों का सोने के दामों पर असर हो सकता है.

हालांकि, अभी तक भारतीय चुनावों का सोने के दामों पर कोई स्पष्ट असर नहीं दिख रहा है.

अगर सोने के दामों में बढ़ोत्तरी हो रही हो तो क्या मध्यम वर्ग को सोने में निवेश करना चाहिए?

आमतौर पर ये कहा जाता है कि जब आपके पास पैसे हों तो सोना ख़रीद लेना चाहिए. हालांकि, ये माना जाता है कि अगर निवेश कम समय के लिए हो तो सोना ख़रीदना अच्छा फ़ैसला नहीं है.

शांता कुमार कहते हैं, “लेकिन, इस समय शादी या लंबी अवधि के लिए सोना ख़रीद लेना सही निवेश है.”

शांता कुमार कहते हैं, “भारत में लोग बड़ी तादाद में सोना ख़रीद रहे हैं. जब आप बैंक में पैसा जमा करते हैं तब ब्याज़ दर कम मिलती है. इसलिए बहुत से लोग सोने में निवेश करते हैं क्योंकि ये अधिक सुरक्षित होता है. इस वजह से भी बाज़ार में सोने की मांग बढ़ रही है.

इस वक्त सोना बेचना कितना सही?
निवेश सलाहकार सतीश कुमार भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ रही महंगाई को सोने के दामों आ रही तेज़ी की मुख्य वजह मानते हैं.

सतीश कुमार कहते हैं, “जनवरी में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका में महंगाई दर 3.1 प्रतिशत है, ये अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफ़ी अधिक है. ये भी सोने के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह है.”

दाम बढ़ने के बावजूद लोग सोने में निवेश करने के इच्छुक क्यों हैं?

सतीश कुमार कहते हैं, “लोग सुरक्षित निवेश का विकल्प देख रहे हैं. ऐतिहासिक रूप से सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है. भारत समेत एशियाई देशों में सोने को पूंजी के रूप में देखा जाता है, लेकिन अन्य देशों में सोने को निवेश के रूप में देखा जाता है.”

क्या जब दाम बढ़ रहे हों तब सोना बेचना सही है?

सोने के दामों में अगर बढ़ोतरी जारी रही तो बहुत से लोग अपना सोना बेचने के बारे में सोच सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा करने से बचना चाहिए.

सतीश कुमार कहते हैं, “जहां तक स्टॉक मार्केट की बात है, जब शेयर के दाम ऊपर हों तब हम उसे बेच सकते हैं, लेकिन सोने को उस तरह नहीं देखा जाना चाहिए. आपको कुछ इंतज़ार करना चाहिए, ऐसा करना समझदारी होती है.”

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