Kidney खराब होने की पहली निशानी, खतरे में डाल सकती जान लापरवाही

नारी डेस्कः (Kidney Failure) और किडनी इंफैक्शन (Kidney Infection) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। किडनी में बढ़ते इंफेक्शन और फेलियर के मामले की वजह खान-पान खराब होना, प्रदूषण और बिगड़ा लाइफस्टाइल ही हैं। जो लोग हाई ब्लड प्रैशर, शुगर के मरीज हैं या ज्यादा दवाइयों का सेवन करते हैं उन्हें किडनी डैमेज का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं घंटों यूरिन को रोके रखने से भी कि़डनी को नुकसान पहुंचता है। अब यहां तक सवाल ये है कि हम अपनी किडनी को स्वस्थ कैसे रखें तो चलिए आपको किडनी हैल्थ के बारे में बताते हैं। आसान स्टेप में बताए तो किडनी को हैल्दी रखना है तो पानी ज्यादा पीएं जो भी खाएं हैल्दी खाए, शराब का सेवन करने से बचे और फिजिकल एक्टिविटी जरूर बनाए रखें। अगर आपको पहले से ही किडनी संबंधी समस्या है तो आपको डाक्टरी सलाह लेनी बहुत जरूरी है।
किडनी खराब होने के पहले संकेत| Kidney Damage First Signs
आमतौर पर आपको किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण बहुत कम दिखते हैं। जब आपको लक्षण दिखने लगते हैं तो सबसे पहले कुछ गड़बड़ होने का संकेत आपके हाथों और पैरों में सूजन, त्वचा में खुजली या बार-बार पेशाब आने से हो सकती है।
बार-बार पेशाब आना: किडनी की समस्याओं के शुरुआती लक्षणों में बार-बार पेशाब आना एक मुख्य लक्षण है। मरीज को ये परेशानी ज्यादातक रात में ही होती हैं।
कम पेशाब आना: दूसरी ओर कुछ लोगों को यूरिन बहुत कम आता है, जिसका सीधा संबंध किडनी की समस्या से होता है।
इसके अलावा ज्यादा थकान महसूस होना, सिर दर्द, कमर की पसलियों के नीचे के हिस्से में दर्द, भूख कम लगना या ब्लड प्रैशर बढ़ना ये भी किडनी डैमेज के प्रमुख लक्षणों में से एक हो सकता है।
क्या हैल्दी फूड खाने से किडनी की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है? Healthy Foods for Your Kidneys
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या एक बार किडनी डैमेज हो जाए तो हैल्दी लाइफस्टाइल अपना कर और हैल्दी खाना खाकर इसे ठीक किया जा सकता है तो बता दें कि किडनी की देखभाल के लिए स्वस्थ आहार आवश्यक है लेकिन एक बार किडनी डैमेज होने के बाद इसे ठीक नहीं किया जा सकता हालांकि यह किडनी की बीमारी की प्रगति को धीमा कर देता है। इसके लिए ज्यादा स्टीक जानकारी आपको किडनी स्पैशलिस्ट से ही मिलेगी। किडनी डैमेज होने के बाद किडनी ट्रांसप्लांट ही सबसे बेस्ट इलाज में शामिल रहता हैलेकिन इसमें बड़ी सर्जरी और जीवन भर दवाइयां (इम्यूनोसप्रेसेंट्स) लेना शामिल है। लगभग 90% प्रत्यारोपण कम से कम 5 वर्षों तक चलते हैं।



