राजनीति

कारसेवकों पर फायरिंग,अयोध्या के संत बोले- ‘सत्ता के लिए गोली चलाई’

आचार्य रामदास ने कहा कि अपनी कुर्सी और अपनी रक्षा के लिए कारसेवकों पर गोली चलाई. कारसेवकपुरम में ट्रक से लाशों को ढोया और सरयू में फेंका गया था, सपा को देखते ही यादें ताजा हो जाती है.

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले अयोध्या में साल 1990 में हुई कारसेवकों पर फायरिंग की घटना को लेकर बहर छिड़ गई है. सपा राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने इस घटना को जायज ठहराते हुए कहा है कि यह संविधान के लिए कारसेवकों पर गोली चलवाई गई थी. वहीं सपा नेता के इस बयान पर अयोध्या के संत-समाज में काफी गुस्सा हैं और उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा के लिए नहीं बल्कि सत्ता के लिए गोली चलवाई गई थी.

सपा नेता शिवपाल यादव के बयान पर आचार्य बालकदास (रामानंदी संप्रदाय) ने कहा कि सत्ता के लिए गोली चलाई इसमें संविधान को रक्षा कैसे. वो सबसे बुरा समय था. वहीं आचार्य बृजमोहन दास ने कहा कि संविधान बनाने वाले हैं संत और उनपर गोली चलाओगे. संविधान बनाया होता तो आज उस पद पर बैठे होते जहां उसे असल में बनाने वाले बैठे हैं.

अपनी कुर्सी और अपनी रक्षा के लिए गोली चलाई

इसके साथ ही आचार्य रामदास ने कहा कि अपनी कुर्सी और अपनी रक्षा के लिए गोली चलाई. कारसेवकपुरम में ट्रक से लाशों को ढोया और सरयू में फेंका गया था. सपा को देखते ही यादें ताजा हो जाती है, हम राजनीति नहीं करते. वहीं सियारघुबर दास (सखी सम्प्रदा) ने कहा कारसेवक पर गोली चलाना गलत है.

संविधान ये नहीं कहता कि कारसेवकों पर गोली चलाओ

आचार्य गरीबन दास ने कहा कि रामभक्तों के साथ अन्याय हुआ और आचार्य योगेश ने कहा कि कोई संविधान ये नहीं कहता कि कारसेवकों पर गोली चलाओ. अपनी राजनीति की रक्षा करने के लिए गोली चलाई. दुःख होता है हृदय में चोट है कि राम भक्त चले गये. इसके अलावा आचार्य राजेंद्र कुमार चौबे (वैष्णव सम्प्रदा) ने कहा कि संविधान की रक्षा के लिए क्या गोली चलवाई. नालियां खूनों से बह गई. ऐसा दृश्य था कि महीनों तक भोजन नहीं हो पाता था.  

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