संपादकीय

बाजार में डर

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर की वजह से वैश्विक मंदी के डर के साथ दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिकी शेयर बाजार इस कदर खौफजदा है कि पिछले हफ्ते वहां का बेंचमार्क इंडेक्स S&P 500 9.1% गिर गया, जो मार्च 2020 में कोरोना वायरस की दहशत के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। S&P 500 इस साल फरवरी के पीक से 17% से अधिक गिर चुका है। 20% से अधिक गिरावट आने पर बाजार मंदी में चला जाता है।

मार्केट में दहशत: इसका असर सोमवार को दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी दिखा। हॉन्गकॉन्ग में बेंचमार्क इंडेक्स 12% से नीचे बंद हुआ, तो ताइवान का बाजार 10% नीचे। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स करीब 8% फिसल गया, जबकि दक्षिण कोरिया 5% से नीचे बंद हुआ। भारत में बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 3% से अधिक फिसला, वह भी तब जबकि इसमें पिछले साल अक्टूबर से ही गिरावट आ रही है।

पॉवेल से मदद नहीं: अमेरिका में दशकों से यह ट्रेंड रहा है कि जब भी निवेशक संकट में होते हैं, वहां का केंद्रीय बैंक किसी न किसी तरह की मदद करता आया है, लेकिन इस बार ऐसे कोई संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चीफ जेरोम पॉवेल ने पिछले शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी टैरिफ अनुमान से अधिक हैं और उसका अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा, यह समझने में वक्त लगेगा। यानी केंद्रीय बैंक की ओर से कोई मदद नहीं मिलने जा रही।

स्टीमुलस से आशा: ट्रंप के टैरिफ का दुनिया के दूसरे देशों पर क्या असर होगा, इसका अंदाजा लगने में भी वक्त लगेगा। इसलिए मार्केट के जानकार फिलहाल निवेशकों को इस अनिश्चितता के दूर होने का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन में अमेरिकी टैरिफ के असर से इकॉनमी को बचाने के लिए शी चिनफिंग सरकार स्टीमुलस पैकेज लाने की सोच रही है।

ज्यादा असर नहीं: भारत में हाल की तिमाहियों में कंजम्पशन डिमांड पर दबाव दिखा था, जिसमें इधर रिकवरी के संकेत मिले हैं और आने वाले वक्त में इसमें और सुधार होने की उम्मीद है। दूसरी बात यह है कि ट्रंप के टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत असर नहीं होगा और इसके असर से बचने के लिए भारत सरकार अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत कर रही है। भारत पर टैरिफ भी दूसरे एशियाई देशों की तुलना में कम लगा है।

डिमांड मजबूत होगी: यहां कुछ दिनों में रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में कटौती की भी उम्मीद है। सरकार के बजट में 12 लाख की आय पर टैक्स छूट और ब्याज दरों में कमी से भी डिमांड को मजबूती मिल सकती है। फिर भी, निवेशकों को जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहिए।

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