राजनीति

​​​फिक्स किया गया चुनाव, लोकतंत्र के लिए जहर…राहुल के एक-एक आरोप पर चुनाव आयोग का आ गया जवाब

नई दिल्लीः महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षराहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने इलेक्ट्रॉनिक डेटा से संबंधित निर्वाचन आयोग के निर्देश का हवाला देते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि साफ दिख रहा है कि “मैच फिक्स” है जो लोकतंत्र के लिए जहर है। वहीं चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी की सीसीटीवी फुटेज की मांग को खारिज दी और एक एक करके जवाब दिया।

चुनाव आयोग ने एक-एक कर दिया जवाब

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में धांधली का आरोप लगाने के बाद CCTV फुटेज की मांग की थी। आयोग ने कहा कि फुटेज देने से लोगों की निजता का उल्लंघन होगा।साथ ही, यह कानून के खिलाफ भी है। आयोग ने यह भी कहा कि फुटेज सिर्फ अंदरूनी निगरानी के लिए है। इसे सिर्फ अदालत के आदेश पर ही दिया जा सकता है। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया है।

चुनाव आयोग ने CCTV फुटेज देने से इनकार करने के कई कारण बताए हैं। पहला, इससे लोगों की निजता का हनन होगा। अगर फुटेज सार्वजनिक कर दिया जाता है, तो यह पता चल जाएगा कि किसने वोट दिया और किसने नहीं। इससे लोगों पर दबाव डाला जा सकता है। उनके साथ भेदभाव हो सकता है। असामाजिक तत्व उन्हें डरा भी सकते हैं। आयोग ने कहा कि “फुटेज साझा करने से, कोई भी समूह या व्यक्ति आसानी से मतदाताओं की पहचान कर सकता है। इससे वोट देने वाले और वोट न देने वाले, दोनों पर असामाजिक तत्वों द्वारा दबाव, भेदभाव और धमकी का खतरा बढ़ जाएगा।”

दूसरा, आयोग ने कहा कि ऐसा करना जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन होगा। चुनाव आयोग के अनुसार, “मतदान केंद्रों से CCTV फुटेज को सार्वजनिक करना, जनप्रतिनिधित्व कानून और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करेगा।”

तीसरा, आयोग ने यह भी कहा कि ये वीडियो सिर्फ अंदरूनी निगरानी के लिए हैं। इन्हें सिर्फ अदालत के आदेश पर ही दिया जा सकता है। पिछले महीने, चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे चुनाव प्रक्रिया के वेबकास्टिंग और वीडियो फुटेज को 45 दिनों के बाद नष्ट कर दें। ऐसा तभी किया जाए, जब परिणाम को अदालत में चुनौती न दी गई हो।

राज्य निर्वाचन अधिकारियों को क्या मिले थे निर्देश

आयोग ने अपने इलेक्ट्रॉनिक डेटा का उपयोग ‘दुर्भावनापूर्ण विमर्श’ गढ़ने के लिए किए जाने की आशंका के चलते अपने राज्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि 45 दिन में चुनाव को अदालत में चुनौती नहीं दी जाती तो वे सीसीटीवी कैमरा, वेबकास्टिंग और चुनाव प्रक्रिया के वीडियो फुटेज को नष्ट कर दें। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 30 मई को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि उसने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई रिकॉर्डिंग उपकरणों के साथ ही फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, सीसीटीवी और वेबकास्टिंग के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को रिकॉर्ड करने के निर्देश जारी किए हैं।

निर्वाचन आयोग पर आगबबूला हुए राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘वोटर लिस्ट? ‘मशीन रीडेबल फ़ॉर्मेट’ नहीं देंगे। सीसीटीवी फुटेज? कानून बदलकर छिपा दी। चुनाव की फोटो-वीडियो? अब 1 साल नहीं, 45 दिनों में ही मिटा देंगे।’ उन्होंने दावा किया कि जिससे जवाब चाहिए था, वही सबूत मिटा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, “साफ दिख रहा है – मैच फिक्स है। और फिक्स किया गया चुनाव, लोकतंत्र के लिए जहर है।”

विपक्ष ने की थी डिजिटल वोटर लिस्ट जारी करने की मांग

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से 2024 के लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए डिजिटल वोटर लिस्ट जारी करने को भी कहा था। उन्होंने चुनाव आयोग से मतदान के दिन शाम 5 बजे के बाद महाराष्ट्र के मतदान केंद्रों से लिए गए सभी CCTV फुटेज जारी करने के लिए भी कहा था। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों द्वारा 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों से शाम 5 बजे के बाद के सीसीटीवी फुटेज जारी करने की मांग की थी। पिछले साल दिसंबर में, सरकार ने सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग फुटेज जैसे कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के साथ-साथ उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए सार्वजनिक निगरानी को रोकने के मकसद से चुनाव नियम में बदलाव किया था।

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