मध्यप्रदेश

राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने पर झुका चुनाव आयोग, बुलाई बड़ी बैठक

भोपाल: राजधानी में चुनाव आयोग दफ्तर के सामने गजब का नजारा दिखा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जैसी भारी-भरकम सियासी हस्तियां गर्मी में दफ्तर के फर्श पर चादर बिछाकर सोई नजर आईं। वजह थी राहुल गांधी की बेहद करीबी और राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म का रिजेक्ट होना। कांग्रेस का आरोप है कि यह लोकतंत्र की हत्या है। वहीं दिल्ली में भी कांग्रेस नेताओं को जब निर्वाचन सदन के भीतर जाने से रोका गया, तो वे मुख्य गेट पर ही धरने पर बैठ गए।

इस पूरे सियासी घमासान की 6 बड़ी बातें:

  • चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बुधवार दोपहर 12 बजे दिल्ली में बैठक का समय दिया है।
  • बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की शिकायत के बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया गया था।
  • आरोप है कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना के एक पेंडिंग क्रिमिनल केस की जानकारी छिपाई।
  • कांग्रेस ने इस कार्रवाई को वोट चोरी के बाद अब बीजेपी की सीट चोरी करार दिया है।
  • भोपाल में जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने पूरी रात चुनाव आयोग के दफ्तर के फर्श पर सोकर काटी।
  • कांग्रेस ने हार न मानते हुए इस पूरे मामले को अब देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में ले जाने का मन बनाया है।

महेश केवट का वो एक दांव

इस पूरे खेल की स्क्रिप्ट बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की एक शिकायत से लिखी गई। केवट ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पुख्ता सबूत रखे कि नटराजन ने तेलंगाना में दर्ज एक पुराने मुकदमे को छुपाया है। फॉर्म रिजेक्ट होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘जब बीजेपी को लगा कि कांग्रेस का घर पूरी तरह एकजुट है और वे वोट नहीं तोड़ पाएंगे, तो उन्होंने कानूनी दांवपेंच का सहारा लेकर सीधे सीट ही चुरा ली।’ बता दें कि नटराजन 2009 से 2014 तक मंदसौर से सांसद रही हैं और बेहद लो-प्रोफाइल रहते हुए सीधे राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा मानी जाती हैं।

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