कैबिनेट की बैठक में नहीं दिखे एकनाथ शिंदे, फिर लगने लगीं नाराजगी अटकलें, जानें महायुति में क्या चल रहा है?

मुंबई: महाराष्ट्र में पिछले साल जब बीजेपी के अगुवाई वाली महायुति गठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की थी तब काफी दिनों तक सीएम को लेकर खींचतान और सस्पेंस की स्थिति बनी थी। तब यह कहा गया कि शिंदे सीएम बनना चाहते हैं खैर बाद में फडणवीस सीएम की कुर्सी पर लौटे थे। अभी महायुति सरकार ने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा नहीं हुआ लेकिन उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नाराजगी की अटकलें लगातार लग रही हैं। मंगलवार के कैबिनेट की बैठक में शिंदे के नहीं होने इस अटकलों ने और जोर पकड़ा। शिवसेना के नेताओं का कहना है कि उप मुख्यमंत्री जम्मू से नहीं लौट पाए थे। इसलिए वह कैबिनेट अटेंड नहीं कर पाए। जो भी हो लेकिन महायुति के दूसरे कार्यकाल में शिंदे खुश नहीं दिख रहे हैं। चर्चा यह भी है कि एकनाथ शिंदे ने नाराजगी के चलते ही कैबिनेट मीटिंग को स्किप कर दिया। शिंदे के साथ उनके पार्टी से मंत्री भरत गोगावले भी बैठक में मौजूद नहीं रहे।
क्या अलग पड़ रही शिवसेना?
ऐसी चर्चा है कि राज्य की महायुति सरकार में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना अलग-थलग पड़ती जा रही है। शिंदे की शिवसेना जहां मंत्रियों को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं तो वहीं महायुति में पालक मंत्री और फाइलों के साथ सीएमओ भेजने, फंड आवंटन जैसे मुद्दों के बाद अब 15 अगस्त पर ध्वजारोहण का मामला गरमाया हुआ है। पालक मंत्रियों के विवाद की वजह से अभी तक रायगढ़ व नाशिक के पालक मंत्री पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है लेकिन स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर रायगढ़ में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी अजीत पवार गुट की कैबिनेट मंत्री अदिति तटकरे को दी गई है जबकि नासिक में बीजेपी के गिरीश महाजन ध्वजारोहण करेंगे। ऐसाी चर्चा है कि रायगढ़ में शिंदे के करीबी भरत गोगावले 15 अगस्त पर ध्वजारोहण करना चाहते थे, लेकिन अदिति तटकरे को यह जिम्मेदारी मिलने से वह नाराज हैं।
सामंत के बयान के क्या हैं मायने?
राज्य में जब यह चर्चा हो रही है कि एकनाथ शिंदे और फडणवीस के बीच पहले वाली गर्मजोशी नहीं दिख रही है। तब शिवसेना नेता और उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा है कि एकनाथ शिंदे को एक बार फिर महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। उन्होंने अपने बयान के पीछे शिवसैनिकों की इच्छा को जोड़ा है। सामंत ने कहा कि चूंकि पिछली सरकार में बतौर मुख्यमंत्री शिंदे के कार्यों और फैसलों के चलते ही महायुति फिर से सत्ता में आई है, इसलिए उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनना चाहिए।



