अंतर्राष्ट्रीय

धोखेबाज भारतीयों को भगाओ, अमेरिका सिर्फ अमेरिकियों के लिए… ट्रंप प्रशासन से अपील H-1B वीजा मत दो, मुश्किलें बढ़ीं

वॉशिंगटन: भारतीय-अमेरिकी समुदाय 2023 में बढ़कर 50 लाख के पार हो गई। कई बाधाओं को पार करते हुए अब अमेरिका में सबसे प्रभावशाली आप्रवासी समूहों में से एक बन गया है, 2024 में आई एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था। उस रिपोर्ट में डायास्पोरा के संस्थापक एमआर रंगास्वामी ने बताया था कि भारतीय अमेरिकी पूरी अमेरिकी आबादी का केवल 1.5 प्रतिशत हैं, फिर भी अमेरिकी समाज के कई पहलुओं पर उनका व्यापक और सकारात्मक प्रभाव जारी है। मगर, सोशल मीडिया पर ही कुछ अमेरिकी यह कह रहे हैं कि भारतीयों को अब और वीजा न दिया जाए। वैसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आए दिन नए नियमों ने पहले ही अमेरिका जाने का सपना देखने वाले भारतीयों की कमर तोड़कर रख दी है। ट्रंप प्रशासन ने H1-B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों को लेकर नियम काफी सख्त कर दिए हैं।

अमेरिका अमेरिकियों के लिए, भारतीयों को भगाओ

सोशल मीडिया एक्स पर “Indian Americans” नाम से कैंपेन चल रहा है। @TRICHFUN नाम के एक यूजर ने लिखा-भारतीय अमेरिकी झूठ बोलते हैं, धोखा देते हैं, चोरी करते हैं और घोटाले करते हैं। बहुत हो गया इस मॉडल अल्पसंख्यक की बकवास, फ्रैंक। वे अमेरिकियों के साथ खुलेआम भेदभाव करते हैं और यहां उनके लिए कोई जगह नहीं है। हर भारतीय को अभी देश से निकाल दो। इस पर TPUSA ग्रुप के फाउंडर और CEO चार्ली किर्क का कहना है कि अमेरिका को भारत से आने वाले लोगों के लिए और वीजा की जरूरत नहीं है। शायद किसी भी तरह के कानूनी आव्रजन ने अमेरिकी कामगारों को भारत से आने वाले लोगों जितना विस्थापित नहीं किया है। बस, बहुत हो गया। हम भर चुके हैं। आइए, आखिरकार अपने लोगों को प्राथमिकता दें। उन्होंने एक और पोस्ट में कहा है कि अमेरिका सिर्फ अमेरिकियों के लिए है।

भारत को और ज्यादा वीजा देना होगा

चार्ली की इस पोस्ट पर Laura Ingraham नाम की एक राइटर ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि यह मत भूलिए कि भारत के साथ किसी भी व्यापारिक समझौते के लिए हमें उन्हें और वीजा देने होंगे। मैं उन्हें वीजा और व्यापार घाटे के रूप में भुगतान नहीं करना चाहती। मोदी को देखना चाहिए कि इसके बजाय वे शी जिनपिंग से क्या शर्तें हासिल कर सकते हैं। वहीं, फ्रैंक लुंत्ज ने द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि अमेरिकी जनसंख्या का केवल 1.5% होने के बावजूद भारतीय अमेरिकी देश के आयकर राजस्व का 5-6% भुगतान करते हैं।

भारतीय फिर से बना रहे अमेरिका को महान

2024 में बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की इस रिपोर्ट ‘इंडियास्पोरा इम्पैक्ट में स्मॉल कम्युनिटी एंड बिग कंट्रीब्यूशंस’ भारतीय प्रवासियों के प्रभाव पर नजर डालने वाली सीरीज की पहली रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें अमेरिका में सार्वजनिक सेवा, व्यवसाय, संस्कृति और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें कहा गया था कि भारतीय अमेरिकियों द्वारा संचालित नवाचार देश के लाभ में योगदान दे रहा है और आर्थिक विकास के अगले चरण की नींव रख रहा है।

27 लाख अमेरिकियों को नौकरी दे रहे भारतीय

2024 की उस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय मूल के सीईओ 16 फॉर्च्यून 500 कंपनियों का नेतृत्व करते हैं, जिनमें गूगल के सुंदर पिचाई और वर्टेक्स फार्मास्युटिकल्स की रेशमा केवलरमानी शामिल हैं। ये नेता सामूहिक रूप से 2.7 मिलियन अमेरिकियों को रोजगार देते हैं और लगभग एक ट्रिलियन का राजस्व पैदा करते हैं। जबकि यह सर्वविदित है कि भारतीय अमेरिकी प्रमुख निगमों का नेतृत्व करते हैं, उनका प्रभाव बड़े व्यवसाय से परे है।

स्टार्टअप्स में 55,00 लोगों को रोजगार

स्टार्टअप की दुनिया में भारतीय-अमेरिकियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति है, जो 648 यूएस यूनिकॉर्न में से 72 के सह-संस्थापक हैं। कैम्ब्रिज मोबाइल टेलीमैटिक्स और सॉल्यूजन जैसी ये कंपनियां 55,000 से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं और इनका मूल्य 195 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, ऐसा इसमें कहा गया है। उद्यमशीलता की भावना देश भर के छोटे व्यवसायों तक फैली हुई है। भारतीय अमेरिकियों के पास सभी यूएस होटलों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है।

रिपोर्ट की ये बातें अमेरिकियों की आंखें खोल देंगी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीयों के पेशे अप्रत्यक्ष रूप से 1.10-1.2 करोड़ अमेरिकी नौकरियां पैदा करते हैं, जो बड़ी व्यावसायिक सफलता से परे उनके व्यापक आर्थिक प्रभाव को प्रदर्शित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में अनुसंधान, नवाचार और शिक्षा जगत भारतीय प्रवासियों के योगदान की बदौलत फल-फूल रहे हैं। 1975 और 2019 के बीच, भारतीय मूल के नवप्रवर्तकों के पास अमेरिकी पेटेंट का हिस्सा लगभग दो प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया।

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