ब्लड डोनेट करने से शरीर में खून की कमी हो जाती है या होता है फायदा? डॉक्टर ने…

Benefits and Risks of Blood Donation: रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि आपका डोनेट किया हुआ खून किसी की जिंदगी बचा सकता है. ब्लड डोनेट करना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. हालांकि कई लोगों के मन में यह डर बना रहता है कि ब्लड डोनेट करने से शरीर में खून की कमी हो सकती है या कमजोर आ सकती है. इस डर की वजह से कई लोग हेल्दी होने के बावजूद ब्लड डोनेट करने से बचते हैं. डॉक्टर्स का साफ कहना है कि ब्लड डोनेट करना सेहत के लिए सुरक्षित है और इससे शरीर को फायदे भी मिल सकते हैं. हेल्दी लोगों को 2-3 महीने में एक बार रक्तदान जरूर करना चाहिए.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि ब्लड डोनेट करना सेहत के लिए पूरी तरह सेफ है. एक बार में लगभग 350 से 450 मिलीलीटर ब्लड लिया जाता है, जो एक स्वस्थ व्यक्ति के खून की मात्रा का छोटा सा हिस्सा होता है. ब्लड डोनेशन के बाद शरीर में मौजूद प्लाज्मा 24 से 48 घंटे के भीतर दोबारा बन जाता है, जबकि रेड ब्लड सेल्स की भरपाई कुछ हफ्तों में हो जाती है. इसलिए स्वस्थ व्यक्ति में रक्तदान से खून की कमी नहीं होती है. सभी लोगों को ब्लड डोनेशन से जुड़ी गलतफहमी से बचना चाहिए.
डॉक्टर ने बताया कि समय-समय पर ब्लड डोनेट करने से शरीर में नई ब्लड सेल्स का निर्माण तेज होता है. इससे बोन मैरो एक्टिव रहता है और नई रेड ब्लड सेल्स बनती हैं. कई रिसर्च में यह भी पता चला है कि ब्लड डोनेशन से हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. ब्लड डोनेट करने के बाद लोगों को हल्की कमजोरी महसूस हो सकती है, लेकिन यह टेंपररी होती है. पर्याप्त पानी पीने, आयरन से भरपूर डाइट लेने और आराम करने से आप नॉर्मल महसूस करेंगे. आमतौर पर पुरुष हर 3 महीने और महिलाएं हर 4 महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं.



