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चैत्र मास में भूलकर भी न करें इन चीजों के सेवन, शास्त्रों से जानें क्या खाएं क्या न खाएं

हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र होता है। चैत्र मास से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। इसी के साथ चैत्र मास से ही मौसम का बदलाव होने भी शुरु हो जाता है। चैत्र मास का आरंभ 15 मार्च से हो गया है और 12 अप्रैल को चैत्र का महीना समाप्त होगा। चैत्र मास का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही महत्व है। आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार, चैत्र मास में क्या खाएं क्या न खाएं। साथ ही जानें चैत्र मास का धार्मिक महत्व।

चैत्र मास में क्या खाएं क्या न खाएं

शास्त्रों के अनुसार,चैत्र मास में नीम का सेवन अधिक करना चाहिए। क्योंकि, इस महीने नीम की पूजा की जाती है और प्रसाद के रुप में नीम का सेवन किया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से बात करें तो इस महीने में छोटे कीटाणु और वायरस अदिक एक्टिव होते हैं। शीतला माता का रोग से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है और मान्यता है की नीम में शीतला माता का वास होता है। इसलिए इस महीने में नीम के पत्तों का सेवन जरुर करना चाहिए।

शास्त्रों में कहा गया है कि चैत्र मास में खाली दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही तेज मसालेदार खाना भी नहीं खाना चाहिए। दूध के सेवन आप या तो मिश्री के साथ कर सकते हैं या फिर शक्कर डालकर आप दूध पी सकते हैं। साथ ही इस महीने गुड का सेवन बिल्कुल भी न करें। खट्टी चीजों का सेवन भी इस महीने में करना वर्जित है।

चैत्र के महीने में पानी का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। क्योंकि, इस महीने में तापमान बढ़ने लगता है ऐसे में शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए समय समय पर पानी पीते रहें और हो सकें तो इस महीने में चने का सेवन अधिक करें।

चैत्र मास में जितना हो सके तामसिक भोजन से परहेज करें। साथ ही मांस मदिरा का सेवन बिल्कुल भी न करें।

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