राष्ट्रीय

DMK को इलेक्टोरल बॉन्ड से मिला 665 करोड़ का चंदा, सिर्फ फ्यूचर गेमिंग कंपनी ने दिए 509 करोड़

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी नई जानकारी अपनी वेबसाइट पर साझा कर सार्वजनिक कर दीं हैं. राजनीतिक दलों ने ये जानकारी सील बंद लिफाफे के माध्यम से इलेक्शन कमीशन को सौंपी थी. सीलबंद लिफाफे की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है.

जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 665.5 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जबकि इस चंदा का 77 फीसद हिस्सा 509 करोड़ रुपये लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के फ्यूचर गेमिंग की ओर से मिला है.

फ्यूचर गेमिंग ने खरीदे सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड

चुनाव आयोग के मुताबिक, फ्यूचर गेमिंग ने सबसे ज्यादा 1368 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं. जिसमें से 37 प्रतिशत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी के द्वारा भुनाया गया है. इसके अलावा डीएमके को मेघा इंजीनियर ने 105 करोड़ रुपये, इंडिया सीमेंट्स ने 14 करोड़ रुपये और सन टीवी ने 100 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा दिया है.

समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट की मानें तो डीएमके को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा देने वालों में मेघा इंजीनियर, इंडिया सीमेंट्स और सन टीवी जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

सबसे ज्यादा BJP को मिला चंदा

निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से खुलासा हुआ है कि अप्रैल 2018 से 2023 के देश भर से बीजेपी को 6986.5 करोड़ रुपये का सबसे ज्यादा चंदा मिला है. इस दौरान आठ बार ऐसे मौके आए हैं जब बीजेपी को एक दिन में एक अरब रुपये या इससे भी ज्यादा का इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए चंदा मिला है. बीजेपी के बाद पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस को 1397 करोड़ रुपये का चंदा मिला है. इसके बाद तीसरे स्थान में कांग्रेस है, जिसे 1334 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जबकि चौथे स्थान पर बीआरएस है. जिसे 1322 करोड़ रुपये का चंदा मिला है.

EC ने जारी किए नए आंकड़े

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों द्वारा सीलबंद कवर के तहत जमा किए गए चुनावी बांड विवरण सार्वजनिक कर दिया है. माना जा रहा है कि विवरण 12 अप्रैल, 2019 से पहले  की अवधि से संबंधित हैं. इस तारीख के बाद के चुनावी बांड विवरण पिछले सप्ताह चुनाव पैनल द्वारा सार्वजनिक किए गए थे.चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल, 2019 के अंतरिम आदेश के निर्देशानुसार, सीलबंद लिफाफे में चुनावी बांड का डेटा सौंपा था.

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