झारखंड में गणेश चतुर्थी का उल्लास, विघ्नहर्ता गणपति की आराधना कर रहे श्रद्धालु

झारखंड में धूमधाम से गणेश चतुर्थी मनायी जा रही है. सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां और कुचाई बाजार क्षेत्र से लेकर गांव-कस्बों में विघ्नहर्ता गणपति की प्रतिमा स्थापित कर लोगों ने पूजा-अर्चना की. बच्चों ने भी गणेश पंडालों में पुष्पाजंलि अर्पित की और आरती उतारी. खरसावां-कुचाई में तीन सौ से अधिक स्थानों पर भगवान गणेश की पूजा की जा रही है. शुक्रवार को गणेश प्रतिमाओं को विसर्जन किया जाएगा.
खरसावां (सरायकेला खरसावां), शचिंद्र कुमार दाश-वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्न कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा…जैसे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बुधवार को गणेश चतुर्थी पर गणपति की आराधना की गयी. इस त्योहार को लेकर झारखंड में उल्लास है. सरायकेला खरसावां जिले के खरसावां-कुचाई के बाजार क्षेत्र से लेकर गांव-कस्बों में लोगों ने विघ्नहर्ता गणपति की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की. बड़ी संख्या में बच्चों ने गणेश पंडालों में पहुंच कर पुष्पाजंलि अर्पित की. इसके साथ ही आरती उतारी. गणेश चतुर्थी पर खरसावां, कुचाई के गली-मुहल्लों में प्रभु सिद्धि-विनायक की पूजा की गयी.
तीन सौ स्थानों पर हो रही गणेश पूजा
खरसावां-कुचाई में तीन सौ से अधिक स्थानों पर भगवान गणेश की पूजा की जा रही है. शुक्रवार को गणेश प्रतिमाओं को विसर्जन किया जाएगा. पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है. लाउड स्पीकर के जरिए भगवान गणेश की महिमा पर आधारित गीत बजाए जा रहे है. पंडालों में आकर्षक विद्युत सज्जा की गयी है.
छोटे-छोटे बच्चों ने किया विद्यारंभ
गणेश पूजा के मौके पर नन्हे बच्चों ने विद्यारंभ किया. इसे स्थानीय भाषा में ‘खड़ी छुंआ’ कहा जाता है. इसमें दो-तीन साल के बच्चों को लेकर मां सरस्वती के पास पूजा कराने के बाद विधिवत लिखने-पढ़ने की शुरुआत कराती हैं. बच्चे चॉक और स्लेट पर लिख कर विद्यारंभ करते हैं. गणेश चतुर्थी और बसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ या अक्षर आरंभ के लिए काफी शुभ माना जाता है. इसीलिए माता-पिता इस दिन अपने-अपने बच्चों का विद्या आरंभ कराते हैं. मौके पर प्रभु गणेश के साथ-साथ माता सरस्वती की आराधना और पूजा कर बच्चों ने स्लेट और चॉक से लिखना शुरू किया. विद्यार्थियों ने उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ आरती भी उतारी. इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया.

