अन्य राज्य

दिल्ली की डेयरी कॉलोनियों को होना होगा रीलोकेट, HC ने MCD से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद सभी डेयरी कॉलोनियों को रीलोकेट करने पर जोर देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एमसीडी से कहा कि वह स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें संबंधित नीति के तहत शिफ्टिंग के लिए तय की जाने वाली शर्तों के बारे में बताया जाए। रिपोर्ट में निगम को यह भी बताना है कि यहां कितनी लाइसेंस धारी डेयरियां हैं और कितनी अनधिकृत।

कोर्ट ने DUSIB को दिए निर्देश

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इसी तरह की जानकारी के साथ दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को भी छह हफ्तों के भीतर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। कोर्ट डेयरियों की स्थिति से जुड़ी सुनैना सिब्बल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

इन डेयरियों की हालत खराब

पूर्व में कोर्ट कमिश्नर ने हाई कोर्ट को बताया था कि सभी नौ डेजिग्नेटिड डेयरी कॉलोनियों की हालत खराब पाई गई, जिनमें काकरोला डेयरी, गोएला डेयरी, नंगली शकरावती डेयरी, झड़ौदा डेयरी, भलस्वा डेयरी, गाजीपुर डेयरी, शाहबाद दौलतपुर डेयरी, मदनपुर खादर डेयरी और मसूदपुर डेयरी शामिल हैं।

आदेश के बाद भी रिलोकेट नहीं हुई कॉलोनियां

कोर्ट ने गौर किया था कि कुछ डेयरी कॉलोनियां में बड़े पैमाने पर निर्माण के साथ उनका शहरीकरण हो गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि इन कॉलोनियों में कोई चारागाह नहीं है और डेयरी प्लॉट आवंटियों द्वारा मवेशियों को क्रूर परिस्थितियों में बांध कर रखा जाता है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि हाई कोर्ट के आदेशों के बावजूद एक भी डेयरी कॉलोनी को रीलोकेट नहीं किया गया है।

एमसीडी के वकील ने किया दावा

जवाब में एमसीडी के स्थायी वकील मनु चतुर्वेदी ने दावा किया कि आदेश के मुताबिक डेयरी कॉलोनियों को शहर के बाहरी इलाकों में रीलोकेट किया जाना था और ऐसा करने के लिए दूसरे राज्यों को भी इसमें शामिल करना होगा। वकील ने कहा, इसलिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लैंडफिल साइट के पास बसीं गाजीपुर और भलस्वा डेयरी को गोएला डेयरी में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया।

चार हफ्तों के अंदर लें फैसला

उन्होंने दावा किया कि चूंकि इन इलाकों बड़े पैमाने पर गोबर जमा होता है, इसलिए गोएला डेयरी में बायोगैस प्लांट लगाया जा चुका। अन्य व्यवस्थाएं भी कर ली गई हैं। फिलहाल शिफ्टिंग की शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिस पर चार हफ्तों के भीतर फैसला लेने को कोर्ट ने निर्देश दिया।

लोगों का क्या है कहना

भलस्वा डेयरी मालिकों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें शिफ्टिंग में कोई आपत्ति नहीं है। डेयरी मालिकों के पुनर्वास से जुड़ी मांग पर कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को सोच-विचार कर इस पर फैसला लेनाचाहिए। साथ में उसने यह भी साफ किया कि डेयरी कॉलोनियों को रीलोकेट तो होना पड़ेगा।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button