छत्तीसगढ़

अवैध धर्मांतरण पर सख्ती बढ़ाएगी छत्तीसगढ़ सरकार, NGO फंडिंग को लेकर विधानसभा में गूंजे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को गैर-सरकारी संगठनों (NGO) द्वारा कथित रूप से विदेशी फंडिंग के जरिए कराए जा रहे धर्मांतरण का मुद्दा गरमाया। गृह मंत्री विजय शर्मा ने भाजपा विधायकों की चिंताओं का जवाब देते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाएगी।

इस विषय पर चर्चा भाजपा विधायक अजय चंद्राकर द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए हुई। उन्होंने विशेष रूप से NGO की विदेशी फंडिंग और उसके उपयोग पर सवाल उठाया। चंद्राकर ने आशंका जताई कि विदेशी फंड का उपयोग धर्मांतरण के लिए किया जा सकता है।

84 NGO की फंडिंग रोकी, 127 का पंजीयन समाप्त

गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि राज्य में 364 NGO सक्रिय थे, जिनकी समीक्षा के बाद 84 संगठनों की फंडिंग रोक दी गई है, जबकि 127 का पंजीयन समाप्त हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी फंडिंग की जांच और नियमन केंद्र सरकार के दायरे में आता है, लेकिन राज्य सरकार NGO की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है।

बस्तर-जशपुर में धर्मांतरण का मामला गंभीर

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने दावा किया कि गरीब और भोले-भाले लोगों को “चंगाई सभा” (हीलिंग मीटिंग) के नाम पर धर्मांतरण के लिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर और जशपुर में कई NGO इस गतिविधि में लिप्त हैं। बस्तर में 19 में से 9 और जशपुर में 18 NGO ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित हैं। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि इन संगठनों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से धर्मांतरण के मामले बढ़ रहे हैं।

उन्होंने मिशनरी शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली ग्रांट की ऑडिट न होने पर भी सवाल उठाए। इस पर गृह मंत्री ने बताया कि राज्य में 153 संगठन विदेशी फंडिंग के तहत पंजीकृत हैं। सरकार जल्द ही पिछले तीन वर्षों की ग्रांट का ऑडिट कराएगी।

चार मामले दर्ज, कड़े कानून की तैयारी

गृह मंत्री शर्मा ने बताया कि इस साल अब तक धर्मांतरण से जुड़े चार मामले दर्ज किए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, लेकिन इसे और कठोर बनाने के लिए सरकार नए प्रावधान जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

‘ज्योशुआ प्रोजेक्ट’ और बस्तर में धर्मांतरण पर भाजपा विधायकों ने जताई चिंता

विधायक सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर में ‘ज्योशुआ प्रोजेक्ट’ के तहत हो रहे कथित धर्मांतरण पर चिंता जताई। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगाया।

केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने बस्तर में बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि बस्तर के 70% गांव इस समस्या से प्रभावित हैं, जिससे आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को खतरा है। टेकाम ने कहा कि अगर जल्द कड़ा कदम नहीं उठाया गया तो छत्तीसगढ़ अपनी आदिवासी पहचान खो देगा।

रायपुर में 15 दिनों में दो धर्मांतरण के मामले

भाजपा विधायक राजेश मुनत ने कहा कि रायपुर में बीते 15 दिनों में दो धर्मांतरण के मामले सामने आए हैं। उन्होंने पूछा कि हिंदू समाज को सार्वजनिक धार्मिक आयोजन के लिए अनुमति लेनी पड़ती है, तो क्या अन्य समुदायों के लिए भी यही नियम लागू होता है? इस पर गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार के निर्देशानुसार बिना अनुमति कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

कानून सख्त करने और फंडिंग पर नजर रखने की तैयारी

विधानसभा में हुई इस चर्चा से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग पर सख्ती बढ़ाने के मूड में है। सरकार NGO फंडिंग की समीक्षा और धर्मांतरण रोकने के लिए मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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