छत्तीसगढ़

चाय वाली के बेटे ने किया नेट क्वॉलीफाई, पीएचडी में बना स्कॉलर

सरगुजा: अंबिकापुर के रहने वाले विनोद गुप्ता ने नेट की परीक्षा 95 प्रतिशत अंक से पास की. जिससे अब वो पीएचडी के साथ ही सहायक प्राध्यापक के लिए क्वॉलीफाई हो चुके हैं. विनोद को मिली इस सफलता के बाद परिवार काफी खुश है. बेटे को मिली इस सफलता से सबसे ज्यादा खुश उसकी मां है. क्योंकि मां के संघर्ष और बेटे की मेहनत ने इस परिवार को समाज में वो मुकाम दिलाया है, जिसके बारे में इन्होंने कभी सोचा भी नहीं था.

विनोद गुप्ता की मां का नाम सीता देवी है. वह अंबिकापुर के गांधीनगर में एक चाय की दुकान चलाती हैं. पहले वह पति और चार बेटों के साथ गांव में रहती थीं. लेकिन साल 2003 में गांव में पति की हत्या कर दी गई. पति की मौत के बाद एक बेटे ने आत्महत्या कर ली, एक बेटे की मौत बीमारी की वजह से हो गई. बचे दो बेटों को पालने के लिये वह साल 2006 में गांव छोड़कर अंबिकापुर शहर आ गईं.

मां के संघर्ष से मिली सफलता: अंबिकापुर में एक समाजसेवी यतीन्द्र गुप्ता इस परिवार का सहारा बने. सहयोग का कारवां ऐसा रहा कि एक अजनबी शख्स ने सीता देवी को बहन बनाया और उन्हें एक चाय की दुकान खोलकर दी. तब से सीता देवी चाय की दुकान चला रही हैं. इसी की बदौलत दोनों बेटों का पालन पोषण किया और अच्छी शिक्षा दिलाई. बेटे भी ऐसे होनहार निकले कि उसने भी कमाल कर दिया है. पहले बीएससी में गोल्ड मेडल पाया और कोरोना काल में सरगुजा के छात्रों के लिये कम्प्यूटर साइंस के लाइनेक्स विषय की किताब लिख दी. जिसे आज छात्र पढ़ते हैं. इसके बाद अब अच्छे नंबर से नेट भी क्वॉलीफाई किया.

आज मैं जहां भी हूं मां और अपने मुंहबोले मामा यतीन्द्र गुप्ता की वजह से हूं. उन्होंने मां को चाय की दुकान खुलवा कर दी. मां ने पढ़ाई में कहीं कमी नहीं की, पैसे उधार लेकर हमें पढ़ाया. मां की वजह से ही आज नेट में क्वॉलीफाई कर चुका हूं. कभी भी मायूस होता हूं तो मां का चेहरा सामने आ जाता है-विनोद गुप्ता, नेट क्वॉलीफाई

आगे भी चलाती रहेंगी चाय की दुकान: सीता देवी का कहना है कि उनके दोनों बेटे जब तक अच्छे से पढ़ लिखकर सफल नहीं हो जाते, तब तक वह चाय की दुकान चलाती रहेंगी. सीता देवी ने समाजसेवी यतीन्द्र गुप्ता का भी आभार जताया. वे उन्हें भाई मानती हैं और कहती हैं कि उनकी मदद के कारण ही आज उनके परिवार के अच्छे दिन लौट आए हैं.

मैंने आठवीं तक पढ़ाई की हूं, लेकिन बच्चों को हमेशा रास्ता दिखाती हूं कि अच्छे से पढ़ाई करनी है, रोज उन्हें पढ़ने को लेकर कहती हूं. आज मेरी मेहनत का फल मिला. जब तक सफलता नहीं मिलेगी, तब तक चाय बेचती रहूंगी -सीता देवी, विनोद गुप्ता की मां

सीता देवी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत: समाजसेवी यतीन्द्र गुप्ता बताते हैं कि समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने के दौरान इनके गांव में जाना हुआ. उसी दौरान अचानक इस परिवार से रिश्ता बन गयापरिवार की हालत काफी खराब थी. इनके रिश्तेदारों से भी कोई मदद नहीं मिली. पति की मौत के बाद दो बेटों की भी मौत हो गई. इन्हें अंबिकापुर बुलाया और इनके लिए रोजगार की तलाश की. गुप्ता बताते हैं कि सीता देवी काफी स्वाभिमानी महिला हैं. वो खुद अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थीं. उनकी सोच को सम्मान देते हुए एक छोटी सी चाय की दुकान खुलवाई. बीमार होने के दौरान भी वह काम करती रही, काफी परिश्रम किया. महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं. पहले सिर्फ पांचवीं पढ़ी थी. पति की मौत के बाद आठवीं तक पढ़ाई की. इस वजह से बच्चों के लिए भी अच्छे भविष्य की कल्पना की.

मां की मेहनत देखकर बेटे ने भी अपने बलबूते आज यूजीसी नेट में सफलता हासिल की. विनोद गुप्ता के कमरे में पूरे नोट्स लगे हुए हैं. फॉर्मूला लिखे हुए हैं. पिछली बार भी यूजीसी में हो गया था, लेकिन स्कॉलर नहीं मिलने की वजह से दोबारा नेट की परीक्षा दी. मां के परिश्रम को सेल्यूट करता हूं -यतीन्द्र गुप्ता, समाजसेवी

इसके अतिरिक्त छात्र संगठन के नेता हिमांशू जायसवाल ने भी छात्र विनोद गुप्ता की हर समय मदद की है. पैसे नहीं होने पर उसकी एमएससी की पूरी फीस माफ कराने में मदद की, और आगे भी विनोद की हर संभव मदद करने को तैयार हैं.

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