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उद्योगों की गैस आपूर्ति में कटौती, हॉर्मुज स्ट्रेट से गैस सप्लाई ठप होने के बाद केंद्र ने लगाया एस्मा

 नई दिल्ली

ईरान के हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली होने वाली सप्लाई बाधित होने के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देश में रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ (एस्मा) लगा दिया है। इसाके तहत रसोई गैस, गाडिय़ों में डलने वाली पीएनजी और स्वास्थ्य इत्यादि जरूरी सेवाओं के इस्तेमाल के लिए एलपीजी की उपलब्धतता सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों की आपूर्ति में कटौती की जाएगी। इन सेवाओं को प्राथमिकता सेक्टर-1 में रखा गया है। इन उपभोक्ताओं को पिछले छह महीने की औसत के बराबर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं अन्य क्षेत्रों के लिए आपूर्ति में कटौती की जाएगी। इस संबंध में जारी गजट अधिसूचना में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर वितरण में समानता और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया गया है। उर्वरक संयंत्रों को प्राथमिकता सेक्टर-2 में रखा गया है। उन्हें पिछले छह महीने की औसत के 70 प्रतिशत तक आपूर्ति की जाएगी। साथ ही यह पाबंदी होगी कि वे इसका इस्तेमाल किसी और उद्देश्य के लिए नहीं कर सकेंगे।

प्राथमिकता सेक्टर-3 में चाय उद्योग, विनिर्माण संयंत्रों तथा अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। वे पिछले छह महीने की औसत के 80 प्रतिशत तक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिटी गैस वितरकों को दी गई है। पेट्रो रसायन संयंत्रों और विद्युत संयंत्रों को भी गैस की आपूर्ति में पूरी तरह या आंशिक तौर पर कटौती की जाएगी। सरकार ने सभी तेल शोधन कंपनियों को एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा है, ताकि आम लोगों के लिए इसकी कमी न हो। अन्य उपभोक्ताओं को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कटौती करते इसे एलपीजी उत्पादन में इस्तेमाल किया जाएगा। तेल शोधन कंपनियों से पिछले छह महीने के उपभोग के 65 प्रतिशत तक ही गैस का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। आदेश में कहा गया है कि भारतीय गैस प्राधिकरण (गेल) और पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के समन्वय में दिए गए निर्देशों के अनुरूप प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रबंध करेगी। पीपीएसी गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्थानांतरित गैस के लिए संयुक्त मूल्य अधिसूचित करेगा, जिस मूल्य पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आपूर्ति की जाएगी। भले ही किसी कंपनी ने पहले से किसी भी मूल्य पर खरीद का समझौता कर रखा हो, यह आदेश उस समझौते के प्रावधानों को निष्प्रभावी कर देगा। इससे प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने वाली कंपनियां तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया, वेदांता आदि प्रभावित होंगी। गेल और अन्य गैस विपणन कंपनियों, तरल प्राकृतिक गैस टर्मिनलों के प्रचालक, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के प्रचालक और शहरी गैस वितरण से संबंधित अवसंरचानों पर भी आदेश का प्रभाव पड़ेगा।

कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद

देश में गैस किल्लत को देखते हुए दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस रोक की वजह से रेस्टोरेंट्स और होटलों के बंद होने की नौबत आ गई है।

कमोडिटी एक्ट लागू होने के बाद चार कैटेगरी में ऐसे बंटेगी गैस

पहली कैटेगरी
रसोई गैस और गाडिय़ों में डलने वाली पीएनजी की सप्लाई पूरी तरह जारी रहेगी
दूसरी कैटेगरी
खाद बनाने वाली फैक्टरियों को अब जरूरत से 70 फीसदी तक ही गैस मिलेगी
तीसरी कैटेगरी
नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्टरियों और बड़े उद्योगों को 20 फीसदी गैस कटौती
चौथी कैटेगरी
छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी पुरानी खपत से 80 फीसदी गैस

रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘एस्मा’ कानून के तहत तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटना है। बता दें कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की एलपीजी खपत 3.13 करोड़ टन रही, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया गया था और शेष की मात्रा आयात पर निर्भर थी।

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