महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में 9 साल से ज्यादा पुरानी कैब नहीं चलेगी

मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एग्रीगेटर कंपनियों (ओला, उबर, रैपिडो) पर अधिक अनुशासन, पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा के लिए ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम 2025’ के ड्राफ्ट की घोषणा की थी। इस ड्राफ्ट में कई नए नियमों का उल्लेख किया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार, ऑटो रिक्शा और कैब के रजिस्ट्रेशन के बाद से वह गाड़ी महज 9 साल तक चलाई जा सकती है। ताड़ी बस की बात करें, तो वो रजिस्ट्रेशन के बाद 8 साल तक चलाई जा सकती है।

हालांकि, इस पर गिग असोसिएशन ने नाराजगी जताई है। उनका मानना है। कि अधिकतर ड्राइवर लोन पर वाहन खरीदते हैं। यदि वाहन की आयु सीमा पूरी होने से पहले ही वह अमान्य घोषित कर दी जाती है, तो चालक न तो कर्ज चुका पाएंगे और न ही नया वाहन खरीद सकेंगे। यह उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बनेगा।

ड्राइवरों के लिए 30 घंटे की ट्रेनिंग ज़रूरी

अब कोई भी ड्राइवर तुरंत किसी एग्रीगेटर कंपनी के लिए गाड़ी नहीं चला सकता है। इसके लिए ड्राइवर को 30 घंटे की ट्रेनिंग लेनी होगी। यह ट्रेनिंग एग्रीगेटर कंपनियों को देनी होगी। यह ट्रेनिंग फिजिकल और ऑनलाइन दोनों तरीके से दी जा सकती है। साथ ही ड्राइवर को मेडिकल टेस्ट भी करवाना होगा। एग्रीगेटर कंपनी को इस ट्रेनिंग की पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

लो रेटिंग वाले ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण

किसी ड्राइवर की रेटिंग 5 में से 2 से भी कम है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से कुछ दिनों के लिए ट्रेनिंग कैंप जाना होगा। ट्रेनिंग पूरी होने तक ड्राइवर को गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी ड्राइवर के खिलाफ कोई पैसेंजर कंप्लेन करता है, तो 3 दिन के भीतर इन्क्वायरी करना जरूरी होगा और जब तक मामला नहीं सुलझता है, तब तक ड्राइवर गाड़ी नहीं चला सकते हैं।

केस दर्ज होने पर खो सकते हैं मौका

ड्राफ्ट में जिक्र है कि एग्रीगेटर कंपनियों को ड्राइवर चुनने से पहले ड्राइवर का बैकग्राउंड चेक करना अनिवार्य होगा, जिसमें यह पता किया जाना चाहिए कि ड्राइवर के खिलाफ कोई आपराधिक मामला तो दर्ज नहीं है। खासकर के ड्राइवर पिछले 3 साल में नशीली दवा, शराब के नशे में वाहन चलाने के अपराध में से किसी में भी दोषी तो नहीं है।

इन बातों की होगी ट्रेनिंग

मोबाइल अप्लीकेशन का इस्तेमाल
संबंधित एक्ट और नियमों की जानकारी।
फर्स्ट रिस्पांडर ट्रेनिंग (इमरजेंसी में जरूरत पड़ने वाली ट्रेनिंग)।
ट्रैफिक नियम, गाड़ियों का मेंटेनेंस, फ्यूल बचाने की तकनीक।
रास्तों से परिचित होना।
ड्राइवर और एग्रीगेटर कंपनी के बीच साइन किए गए एग्रीमेंट की जानकारी।
जेंडर सेसिटिविटी और दिव्यांगजन सेसिटिविटी पर ख़ास ध्यान।
राज्य सरकार द्वारा दिए गए अन्य मुद्दे।

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