छत्तीसगढ़

नहीं मिल रहे बीएससी मैथ्स स्टूडेंट, कंप्यूटर साइंस का भी बुरा हाल, डिग्री कॉलेजों की सीट में कटौती

कोरबा: छत्तीसगढ़ में कोरबा जिले के दो और प्रदेश भर के 38 शासकीय कॉलेज में गणित-विज्ञान, बीसीए और कॉमर्स समेत विभिन्न कोर्स की स्थिति डांवाडोल है. ऐसे में कुछ कॉलेज जहां बंद हो गए, वहीं कुछ को विलय करने की तैयारी है.

डिग्री कॉलेजों की सीट में कटौती: खासतौर पर गणित विषय में प्रवेश जीरो हुआ है तो एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की तुलना में पास होने वाले छात्रों की संख्या कम हुई है. ऐसे में उन महाविद्यालय में स्वीकृत सीट संख्या घटाई जा रही है या कोरबा के उमरेली जैसे कॉलेजों में समूह को ही बंद किया जा रहा है. जबकि शहर के बीचों-बीच स्थित शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में सीटों की संख्या को आधा किया जा रहा है.

अकादमिक स्थिति चिंताजनक: कोरबा जिले की जिन उच्च शिक्षण संस्थाओं में गणित और कंप्यूटर सांइस की अकादमिक स्थिति चिंताजनक है. उनमें उपलब्ध सीटों की संख्या में कटौती की तैयारी कर ली गई है.

पोषक शाला अभियान की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े: पोषक शाला अभियान के तहत प्रस्तुत रिपोर्ट में फिलहाल जिले के दो शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं. इनमें शासकीय मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज और शासकीय नवीन कॉलेज उमरेली का भी नाम है. मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज में गणित संकाय में प्रवेश व उत्तीर्ण की संख्या कम होने के कारण गणित व कंप्यूटर साइंस में स्वीकृत सीट 60-60 के स्थान पर 30-30 करने की अनुशंसा की गई है.

करतला ब्लॉक में खुले शासकीय नवीन महाविद्यालय: वहीं करतला ब्लॉक में खुले शासकीय नवीन महाविद्यालय उमरेली में पिछले दो वर्षों से प्रवेश संख्या नहीं है. पोषक शालाओं में भी इस विषय में प्रवेश न्यूनतम है. इसलिए यहां गणित समूह को बंद करने की अनुशंसा की गई है.

मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज: कोरबा जिले के महाविद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रमों और उनमें उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की अकादमिक स्थित पर की गई समीक्षा में कुछ संस्थाओं से निराशाजनक नतीजे सामने आए हैं. इनमें शहर के मध्य संचालित कोरबा जिले के एकमात्र कन्या महाविद्यालय, मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज और शासकीय महाविद्यालय उमरेली शामिल हैं.

स्कूलों में ही बच्चे कम जो नहीं ले रहे कॉलेज में प्रवेश: दरअसल कॉलेज में बच्चों का प्रवेश पोषक शालाओं पर निर्भर करता है. इसका अर्थ संबंधित कॉलेज के आसपास के इलाके में स्थापित स्कूलों से है. रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जिन कॉलेजों में गणित और कंप्यूटर साइंस की स्थिति चिंताजनक है, उनके अधीन संचालित पोषक शाला में भी गणित और कंप्यूटर साइंस के बच्चे बेहद कम हैं. वहां भी संख्या कम होने के कारण बच्चे कॉलेज तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. जो बच्चे गणित विषय में उत्तीर्ण हो रहे हैं, वह भी डिग्री कॉलेज में रहकर पढ़ाई नहीं करना चाहते. उनकी रुचि इंजीनियरिंग या दूसरे कोर्सेज में है. इस कारण कॉलेज में प्रवेश कम हुआ है.

शासकीय महाविद्यालय जटगा: कोरबा जिले में 6 साल पहले शुरू पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के शासकीय महाविद्यालय जटगा की भी यही स्थिति है. उधार के भवन में कॉलेज का संचालन किया जा रहा है. उमरेली भी उधार के भवन में ही संचालित हो रहा है. सरकारों ने नए कॉलेज खोले, लेकिन संसाधन उपलब्ध नहीं कराया. इसका साइड इफेक्ट अब सामने आने लगा है. ऐसे कॉलेजो में कोर्स बंद करने की स्थिति बन रही है. जटगा कॉलेज को तो पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. खास तौर पर ग्रामीण अंचल में संचालित कॉलेज की स्थिति ज्यादा चिंता जनक है. बच्चे कॉलेज तक पहुंची नहीं पा रहे हैं. परंपरागत डिग्री कोर्सेज के प्रति बच्चों की रुचि भी कम हुई है. जानकार इसका कारण शिक्षा का रोजगारपरक नहीं होना भी मानते हैं.

स्कूलों से नहीं आ रहा है बच्चे कॉलेज: शासकीय ईवीपीजी लीड कॉलेज के सहा प्राध्यापक एसके गोभिल का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन के आयुक्त, उच्च शिक्षा से पत्र प्राप्त हुआ है. जिसमें कॉलेज के भरे गए और खाली सीटों की जानकारी मांगी गई थी. जहां बच्चे एडमिशन नहीं ले रहे हैं. वहां की सीट कम करने का प्रस्ताव है. इसमें जिले के दो कॉलेज प्रभावित हो रहे हैं. शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय और शासकीय महाविद्यालय उमरेली में गणित और कंप्यूटर साइंस में बच्चों ने प्रवेश नहीं लिया है.

कंप्यूटर साइंस में एडमिशन: एसके गोभिल कहते हैं इसका मुख्य कारण पोषक विद्यालय से भी शुरू होता है. जो विद्यालय इन कॉलेज के पोषक विद्यालय हैं, वहां से ही बच्चे इन कॉलेज में गणित और कंप्यूटर साइंस में एडमिशन नहीं ले रहे हैं. हो सकता है कि गणित लेकर पढ़ने वाले बच्चे इंजीनियरिंग करने के लिए चले जा रहे हों, इसलिए वह इसमें केवल बीएससी की डिग्री नहीं प्राप्त करना चाहते. इस वजह से ही दोनों कॉलेजों में सीटों की कटौती की जा रही है. बच्चे एडमिशन नहीं ले रहे हैं, इसलिए ही सीटों की संख्या घटाई जा रही है.

शिक्षा को रोजगार परक बनाने के लिए ही लाई गई एनईपी: मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज के सहायक प्राध्यापक प्रकाश साहू कहते हैं कि शिक्षा को रोजगारपरक और रुचिकर बनाने के लिए नई शिक्षा नीति लागू की गई है. इसके तहत कई तरह के सुधार किए गए हैं. उच्च शिक्षा में जो बच्चे साइंस लेकर पढ़ रहे हैं, उन्हें आर्ट्स लेने का मौका मिलेगा. जो बच्चा आर्ट लेकर पढ़ रहा है, वह भी साइंस और कॉमर्स की पढ़ाई कर सकेगा. सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है. डिग्रियों में भी परिवर्तन किया गया है. पहले व दूसरे ईयर की पढ़ाई के बाद यदि कोई बच्चा गैप करता है तो उसे भी डिग्री प्रदान की जाएगी.

कॉम्पिटेटिव परीक्षाएं: प्रकाश साहू कहते हैं कि गैप होने के काफी साल बाद भी यदि बच्चा डिग्री करना चाहता है तो उसे भी अवसर प्रदान किया जाएगा. ऐसे कई तरह के सुधार किए गए हैं. स्किल पर फोकस किया गया है ताकि बच्चों को स्किलफुल बनाया जाए. पढ़ाई पूर्ण करने के बाद स्वरोजगार और जॉब दोनों ही तरह की तैयारी कर सके. इस तरह की पढ़ाई करवाई जा रही है. खास तौर पर जो कॉम्पिटेटिव परीक्षाएं होती हैं, सिविल सर्विसेज के एग्जाम होते हैं, उसकी तैयारी करने वाले बच्चों को इसका लाभ मिलेगा. लेकिन अभी यह काफी शुरुआती फेज है. आने वाले समय में इसके परिणाम सामने आएंगे.

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