राजनीति

संविधान बदल देंगे वाला परसेप्शन के कारण अयोध्या में बीजेपी की हार…

आईएएस मेंटर विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि संविधान बदल देंगे वाला परसेप्शन उत्तर प्रदेश में बेहद प्रभावी नजर आया। बिहार में ये इसलिए नहीं चला क्योंकि वहां नीतीश कुमार बीजेपी के साथ थे। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी नीतीश कभी संविधान पर हमला नहीं होने देंगे। हालांकि, यूपी में इस मुद्दे का असर दिखा। अयोध्या को लेकर लोग कहते हैं कि वहां मंदिर बना फिर भी बीजेपी कैसे हार गई। विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि वो सीट तो फैजाबाद है, उसमें 5 में से एक हिस्सा ही अयोध्या है। फैजाबाद के आस-पास लगभग सभी सीटें समाजवादी पार्टी ने जीती हैं इसलिए ये मामला किसी एक सीट का तो है नहीं।

2024 के चुनाव में जिस तरह से बीजेपी को अयोध्या में शिकस्त मिली, उसकी चर्चा देशभर में हुई। भव्य राम मंदिर बनने के बाद शायद ही किसी को उम्मीद रही होगी कि बीजेपी अयोध्या में असफल हो जाएगी। हालांकि, इस बार ऐसा ही हुआ। पार्टी को वहां एसपी कैंडिडेट से शिकस्त का सामना करना पड़ा। आखिर वो क्या फैक्टर रहे जो फैजाबाद सीट पर भारतीय जनता पार्टी के हार की वजह बने इस पर विकास दिव्यकीर्ति ने खुलकर बात की। उन्होंने उन सभी बातों का जिक्र किया जो फैजाबाद सीट पर कमल के नहीं खिलने के उत्तरदायी थे। वहां की डेमोग्राफी से लेकर जातीय समीकरण तक हर प्वाइंट का जिक्र विकास दिव्यकीर्ति ने किया।

‘संविधान बदल देंगे’ वाली बात का दिखा असर

यूपीएससी सिविल सर्विस की तैयारी कराने वाले चर्चित शिक्षकों में शामिल विकास दिव्यकीर्ति ने अयोध्या में बीजेपी की हार के पीछे कई वजहों का जिक्र किया। एएनआई से बात करते हुए आईएएस मेंटर विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि इस चुनाव में सोशल मीडिया का रोल बेहद अहम रहा। भविष्य के चुनाव भी सोशल मीडिया के दम पर ही लड़े जाएंगे। मीडिया की आजादी का मतलब यही है कि अगर कोई फैक्ट्स से छेड़छाड़ नहीं कर रहा तो उसे मीडिया में बोलने का हक है। हालांकि, इस चुनाव में एक धारणा, जुमला या नारा जो भी कहें, ‘संविधान बदल देंगे’ वाली बात जो सामने आई उसने अहम रोल निभाया। उन्होंने ये भी कहा कि संविधान बदल देंगे वाली बात सबसे पहले अयोध्या से ही उठी थी।

क्यों यूपी में बीजेपी को लगा झटका, विकास दिव्यकीर्ति ने बताया

विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि जैसे ही ‘संविधान बदल देंगे’ वाली बात सामने आई तो उससे लोगों में ये मैसेज गया कि आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि, ऐसा कुछ था नहीं और बीजेपी ने कई बार ये बात कही ऐसा कुछ नहीं होगा, पर पॉलिटिक्स परसेप्शन पर चलती है। अगर लोगों के मन में ये धारणा बैठ गई कि ये लोग आरक्षण खत्म कर देंगे, संविधान बदल देंगे, इस प्वाइंट ने अहम रोल निभाया। हालांकि, जनता को ये पता नहीं है कि संविधान कैसे बदला जाता है। उन्हें ये जानने में रुचि भी नहीं है। विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि संविधान बदलने के लिए 400 सीटें चाहिए ही नहीं। 355 सीटें ही काफी हैं उसके लिए, ये तो सामान्य सी बात थी।

जातीय समीकरण का भी रोल अहम

विकास दिव्यकीर्ति ने फैजाबाद लोकसभा सीट के जातीय समीकरण का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फैजाबाद का डेमोग्राफिक इंडेक्स देखें तो वहां ओबीसी 22 फीसदी हैं। दलित 21 पर्सेंट, मुस्लिम 18 पर्सेंट हैं। तीनों मिलाकर 60 फीसदी के आस-पास हो जाते हैं। ओबीसी वोट समाजवादी पार्टी के माने ही जाते हैं। दलित वोट उन्हें मिल जाएं इसके लिए उन्होंने दलित कैंडिडेट को उतारा। नॉन रिजर्व्ड सीट पर दलित उम्मीदवार को उतारना रेयर इंसीडेंट है। इसका असर अयोध्या में नजर आया। दलित वोट सपा के साथ गया। मुस्लिम का बीजेपी को वोट जाता नहीं तो इसलिए इन तीनों को मिलाकर 60 फीसदी वोट हो रहा। ऐसे में बीजेपी का अयोध्या में हारना बहुत आश्चर्य की बात है नहीं, लेकिन मीडिया में ज्यादा हल्ला मचा हुआ है।

ऐसे एसपी ने बीजेपी को फैजाबाद में हराया

विकास दिव्यकीर्ति ने बताया ने फैजाबाद सीट पर पिछले दो चुनावों की स्थिति देखें तो जीतने वाले कैंडिडेट को ज्यादा वोट नहीं मिला था। विनिंग गैप महज 12 हजार के आस-पास था। इस बार दलित वोटर्स सपा के साथ आ गए। हर बार बीएसपी को करीब डेढ़ लाख वोट मिलते थे। इस बार बीएसपी कैंडिडेट को 50 हजार के करीब वोट मिले। ऐसे में एक लाख वोट के करीब एसपी को ट्रांसफर हुए। वहीं सपा उम्मीदवार अवधेश कुमार करीब 50 हजार वोटों से ही जीते हैं। ऐसे में बीजेपी की हार कोई चौंकाने वाली वजह नहीं है।

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