भिलाई पार्षद संतोष सिंह जलंधर को हाईकोर्ट से जमानत

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के भिलाई में जमीन घोटाले के आरोप में संतोष सिंह उर्फ जलंधर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. 10 मार्च को उनकी गिरफ्तारी के बाद शनिवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है. कोर्ट ने इस कार्रवाई को लेकर दुर्ग पुलिस पर सख्त टिप्पणी की है. 4 मार्च 2025 को जमीन धोखाधड़ी केस में संतोष सिंह उर्फ जलंधर की गिरफ्तारी हुई थी.
संतोष सिंह के वकील ने क्या कहा?: संतोष सिंह उर्फ जलंधर के वकील बीपी सिंह ने इस केस की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि एसआई अमित अदानी और सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी को नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट ने अपने आदेश की कॉपी डीजीपी, जिला जज और मजिस्ट्रेट को भेजी है. कोर्ट ने डीजीपी को पूरे मामले की मॉनिटरिंग करने और एसआई के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. इस केस में एक अन्य एसआई को बुधवार को लाइन अटैच कर दिया गया है. संतोष सिंह की गिरफ्तारी को लेकर दुर्ग पुलिस पर गंभीर सवाल उठे हैं.
वकील ने केस पर दी जानकारी: संतोष सिंह जलंधर के वकील बीपी सिंह ने मीडिया को जानकारी दी है. उसके मुताबिक जिस एफआईआर के आधार पर जलंधर को गिरफ्तार किया गया, उसमें उसका नाम ही नहीं था. यह केस साल 2023 में शुरू हुआ. जब पुलिस ने एम धनराजू और अरविंद के खिलाफ केस दर्ज किया. इसके बाद संतोष सिंह का नाम निचली अदालत में जोड़ दिया गया.
संतोष सिंह ने हाईकोर्ट का रुख किया: इसके बाद संतोष सिंह जलंधर ने इस एफआईआर को समाप्त करने की याचिका लगाई. हाईकोर्ट ने इस मामले में एसपी को निर्देश दिया कि, अब तक चालान कोर्ट में पेश क्यों नहीं हुआ, इस पर शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाए. जब शपथ पत्र जमा किया गया, तो कोर्ट की डबल बेंच ने डीजीपी को नोटिस जारी किया. इस केस में पुलिस ने लगभग 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. उसके बाद डीजीपी ने 5 पुलिसकर्मियों को निंदा की सजा सुनाई थी.
पुलिस पर क्या है आरोप?: इस केस में पुलिस पर बदले की भावना से कार्रवाई का आरोप लगा है. इस केस में पहले ही कई पुलिसकर्मियों को सजा मिल चुकी है. इसलिए पुलिस ने संतोष सिंह उर्फ जलंधर को अवैध तरीके से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जलंधर ने हाईकोर्ट में अपील कर अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी.हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं.
डीजीपी को कोर्ट ने दिए निर्देश: अदालत ने न केवल जलंधर को जमानत दी, बल्कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए डीजीपी को पूरे केस की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही डीपीजी को दोषी अधिकारियों पर एक्शन के निर्देश कोर्ट ने दिए हैं.



