बांग्लादेश बनेगा पाकिस्तान… भारत ने जो सुविधा की बंद वो लाएगा बर्बादी, नहीं बचा पाएगा मौकापरस्त चीन

नई दिल्ली: दुनिया में पाकिस्तान जो कटोरा लेकर घूम रहा है, वही बांग्लादेश थामने वाला है। वह पूरी तरह बर्बादी की राह पर बढ़ चला है। चीन की तरफदारी उसे महंगी पड़ने वाली है। भारत ने बांग्लादेश को दी जा रही एक खास सुविधा को रद्द कर दिया है। यह सुविधा बांग्लादेश को भारतीय जमीन के रास्ते दूसरे देशों को सामान भेजने में मदद करती थी। यह फैसला मुहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के बाद लिया गया। यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘समुद्र तक पहुंच से वंचित’ बताया था। उन्होंने बांग्लादेश को ‘क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र रक्षक’ बताया था। साथ ही कहा था कि चीन के पास अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का मौका है। वैसे, भारत ने साफ किया है कि इस फैसले से नेपाल और भूटान को होने वाले निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि इससे देरी हो रही थी। लागत बढ़ रही थी। भारत के निर्यात में भी रुकावट आ रही थी। यह सुविधा जून 2020 में शुरू की गई थी। इससे बांग्लादेश को भूटान, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों को सामान भेजने में आसानी होती थी। अब यह सुविधा बंद होने से बांग्लादेश का निर्यात महंगा हो जाएगा।
भारत से बांग्लादेश को मिली इस सुविधा का नाम है ट्रांस-शिपमेंट फैसिलिटी। ट्रांस-शिपमेंट सुविधा का मतलब है कि एक देश से दूसरे देश में सामान भेजने के लिए किसी तीसरे देश के बंदरगाह या हवाई अड्डे का इस्तेमाल करना। भारत ने 2020 में बांग्लादेश को यह सुविधा दी थी। इससे बांग्लादेश अपने सामान को भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों के जरिए दूसरे देशों में भेज सकता था।
भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर बढ़ गई थी भीड़
हालांकि, इस सुविधा की वजह से भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर बहुत भीड़ हो गई। इससे भारतीय निर्यातकों को परेशानी होने लगी। उनका सामान समय पर नहीं पहुंच पा रहा था। उन्हें ज्यादा किराया देना पड़ रहा था। लिहाजा, भारतीय निर्यातकों ने सरकार से इस सुविधा को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, अपना नुकसान होने के बावजूद भारत ने पड़ोसी देश के लिए इस सुविधा को खुला रखा। यह उसकी तरक्की में मदद के लिए भारत की ओर से तोहफा जैसा था।
यह और बात है कि बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने चीन यात्रा के दौरान भारत के बारे में कुछ ऐसी बातें कहीं जो भारत को पसंद नहीं आईं। उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को समुद्र तक पहुंच से वंचित बताया। साथ ही बांग्लादेश को क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र रक्षक करार दिया। इससे भारत को लगा कि बांग्लादेश चीन को बढ़ावा दे रहा है।
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने ट्रांस-शिपमेंट सुविधा को रद्द करने का फैसला किया। सरकार का कहना है कि इस फैसले से भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर भीड़ कम होगी। भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा।
आंकड़ों से समझिए कितने बड़े नुकसान का अंदेशा
अब आंकड़ों से यह भी समझते हैं कि बांग्लादेश ने इस सुविधा से कितना तगड़ा फायदा उठाया है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में पेट्रापोल भूमि बंदरगाह पर भारत के रास्ते दोबारा निर्यात के लिए बांग्लादेश से भेजा जाने वाला पारगमन माल (ट्रांजिट गुड्स) वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान 46 फीसदी बढ़ गया। हालांकि, ट्रांस-शिपमेंट सुविधा रद्द होने के बाद बांग्लादेश का पारगमन माल से लदा कोई भी ट्रक 9 अप्रैल से पेट्रापोल सीमा से नहीं आया।
पेट्रापोल क्लियरिंग एजेंट्स स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन (पीसीएएसडब्ल्यूए) की तरफ से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में 2,357.27 करोड़ रुपये मूल्य की 4,733 खेप ले जाने वाले 3,473 ट्रक पेट्रापोल के रास्ते बांग्लादेश से भारतीय सीमा में पहुंचे थे। वित्त वर्ष 2024-25 में 4,861 ट्रकों ने 3,446.66 करोड़ रुपये मूल्य की 7,772 खेपों का परिवहन किया। यह उससे पहले के साल की तुलना में ट्रक आवाजाही में 36 फीसदी और माल के मूल्य में 46 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाता है।
भारत ने 29 जून, 2020 से भारतीय भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों के माध्यम से और बाद में भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों के जरिये बांग्लादेश से तीसरे देशों को भेजे जाने वाले निर्यात माल के पारगमन की अनुमति दी थी। हालांकि, इस साल 8 अप्रैल को भारत सरकार ने सुविधा को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद बांग्लादेश के बेनापोल बंदरगाह ने 9 अप्रैल को पारगमन माल ढोने वाले चार ट्रकों को लौटा दिया।
ट्रांस-शिपमेंट सुविधा क्या है?
2020 में भारत के कस्टम्स विभाग ने एक आदेश जारी किया था। इसमें बांग्लादेश को दिल्ली एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के जरिए तीसरे देशों को सामान भेजने की इजाजत दी गई थी। इससे बांग्लादेशी निर्यातकों को नेपाल, भूटान और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों तक आसानी से पहुंचने में मदद मिली। हालांकि, इससे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर ज्यादा भीड़ हो गई। इससे भारतीय सामान की शिपमेंट में देरी हुई और भारतीय निर्यातकों के लिए एयर फ्रेट रेट बढ़ गए। भारत के ताजा कदम से बांग्लादेशी निर्यातकों के लिए इन देशों को सामान भेजना महंगा हो सकता है। इसमें ज्यादा समय लग सकता है। इससे बांग्लादेशी निर्यातकों के लिए मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा। बांग्लादेश ने चीन की तरफ झुककर यह आफत बैठे बैठाए मोल ली है। मौकापरस्त चीन भी इस परेशानी से बांग्लादेश को नहीं बचा पाएगा। अलबत्ता, आज जो हाल पाकिस्तान का है, वही बांग्लादेश का हो जाएगा।



